धाम अयोध्या सजा चुके अब मथुरा जी की बारी है

– धाम अयोध्या सजा चुके अब मथुरा जी की बारी है
– मेला में देर रात्रि तक चला कवि सम्मेलन

मथुरा। नववर्ष मेला समिति के विशाल नववर्ष मेला में सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार को देर रात्रि सेठ बी०एन० पोद्दार इंटर कॉलेज में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में वीर रस और हास्य रस के कवियों ने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को बांधे रखा।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ मोनिका देहलवी ने सरस्वती वंदना से किया। वीर रस के कवि अजय अंजाम ने अपनी प्रसिद्ध हल्दीघाटी की कविता सारे जग के ऊपर अपना ध्वज फहराने की तैयारी है। “धाम अयोध्या सजा चुके अब मथुरा जी की बारी है” से श्रोताओं में जोश भर दिया।

राधाकांत पांडे ने ब्रज की अलौकिक छटा को निहार कर, नववर्ष पर राधे-राधे बोलिए का गायन किया। डॉ० कुमार मनोज ने प्रेम रस की कविता मोहब्बत जब कभी करना तो पौधों की तरह करना, जो महल में भी माटी साथ ले जाती है को सभी ने सराहा।

हास्य कवि पार्थ नवीन और महेंद्र अजनबी ने हास्य कविताओं से लोगों को खूब गुदगुदाया। वीर रस की कवियित्री ज्योति त्रिपाठी की कविता जो जीवन दर्शन जाने उसे सनातन कहते हैं, कण कण में ईश्वर पहचाने उसे सनातन कहते हैं, सारी वसुधा को जो घर माने उसे सनातन कहते हैं ने सभी श्रोताओं को ताली की गड़गड़ाहट को मजबूर कर दिया।

वीर रस कवि मनवीर मधुर के काव्य पाठ कुछ दहन किया जाए तन से रावण, कुछ मन से राम बन जाए को खूब सराहा गया। मनवीर मधुर और डॉ० कुमार मनोज ने संयुक्त रूप से कवि सम्मेलन का संचालन किया।

इससे पूर्व मां भगवती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सभी कवियों का समिति पदाधिकारी द्वारा स्वागत किया गया। कवि सम्मेलन चौधरी किशन सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष एवं कुलाधिपति के० एम० विश्विद्यालय के सौजन्य से कराया गया।

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