मुंबई में 9 नवंबर, 2008 (9/11) आतंकवादी हमलों के मास्टरमाइंड साजिद मीर को पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया है। एफबीआई ने साजिद मीर को ‘मोस्ट वांटेड’ आतंकी घोषित किया है।
अमेरिकी एजेंसी ने विदेशी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आतंकवादियों की सहायता करने, संयुक्त राज्य के बाहर अपने नागरिकों की हत्या करने और सार्वजनिक स्थानों पर बमबारी करने की साजिश रचने के आरोप में मीर को “सर्वाधिक वांछित” घोषित किया।
मुंबई हमलों में मारे गए 12 लोगों में से छह अमेरिकी थे। एफबीआई ने मीर की गिरफ्तारी और दोषसिद्धि के लिए सूचना देने वाले को 50 लाख तक का इनाम देने की पेशकश की है। पाकिस्तान सरकार हमेशा साजिद मीर के बारे में झूठ बोलती रही है।
पाकिस्तान ने हमेशा साजिद मीर के अस्तित्व को नकारा है। पाकिस्तान ने तो यहां तक दावा किया था कि साजिद मीर मारा गया है। लेकिन अब जबकि पाकिस्तान आर्थिक दरिद्रता के कगार पर है और एफएटीएफ से राहत की उम्मीद कर रहा है, वह अपने आतंक को खिलाने के कलंक को दूर करना चाहता है।
साजिद मीर सीधे पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करता था। तैयबा ने साजिद मीर के साथ मिलकर ISI की मदद और समर्थन से मुंबई में हमलों को अंजाम दिया। जब आतंकी मुंबई में थे तो पाकिस्तान में उनका कंट्रोलर साजिद मीर था और सारी जानकारी देता था।
एफबीआई का मानना है कि उसने 2006 और 2007 के बीच एक डेनिश अखबार और उसके कर्मचारियों पर आतंकवादी हमले को अंजाम देने की साजिश रची थी। एफबीआई ने 4 अप्रैल, 2011 को साजिद मीर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
साजिद मीर दाऊद गिलानी उर्फ डेविड कोलमैन हेडली का हैंडलर था। हेडली पाकिस्तानी-अमेरिकी डबल एजेंट था जिसने मुंबई हमलों के लिए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी दल को तैयार किया था।











