भारत जल्द ही बनेगा स्पेस सुपर पावर और इसके लिए वायु सेना को साथ जोडा जाएगा। अब भारतीय वायु सेना का नाम बदलकर ‘भारतीय वायु और अंतरिक्ष सेना’ (IASF) किए जाने का प्रस्ताव है।
यह उन बदलावों का प्रतीक है जो भारत को एक बेहतरीन ‘एयर पावर’ से ‘मजबूत एयरोस्पेस पावर’ बनाएंगे। IAF ने सरकार को पूरा प्लान बनाकर भेज दिया है। IAF ने अंतरिक्ष के हर पहलू का दोहन करने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। अब यह सिर्फ ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रीकॉनेसॉ), कम्युनिकेशन और नेविगेशन क्षमताओं तक सीमित नहीं है। वायुसेना अब ISRO, DRDO, IN-SPACe और प्राइवेट इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम कर रही है। ‘PNT (पोजीशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग), अडवांस्ड ISR और कम्युनिकेशन, अंतरिक्ष मौसम भविष्यवाणी, स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस, स्पेस ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में काम चल रहा है।’
अब भारतीय वायुसेना का प्लान है कि अगले आठ सालों में प्राइवेट सेक्टर की मदद से 100 से ज्यादा छोटे-बड़े मिलिट्री सैटलाइट्स अंतरिक्ष में पहुंचा दिए जाएं। इसके साथ ही ऑफिसर्स और एयरमेन की ट्रेनिंग में अब अंतरिक्ष सेक्टर को भी शामिल किया गया है। क्योंकि आने वाले समय में अंतरिक्ष के करीब, 20 से 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर, और आउटर स्पेस में भविष्य के युद्ध होंगे। अतः हमें इसकी तैयारी अभी शुरू करनी होगी।






