अखिल भारतीय हिंदू महासभा में नई नियुक्तियां: हिंदू हितों की रक्षा के संकल्प को दोहराया गया

अखिल भारतीय हिंदू महासभा में नई नियुक्तियां: हिंदू हितों की रक्षा के संकल्प को दोहराया गया

नई दिल्ली:

अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने हिंदू समाज की रक्षा और संगठन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर नई नियुक्ति की घोषणा की है। राष्ट्रीय संयोजक संतोष वशिष्ठ ने हिंदू धर्म और संस्कृति की रक्षा के प्रति महासभा की प्रतिबद्धता दोहराते हुए वसीम रिज़वी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह सेंगर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा की।

संगठन के सदस्यों का बयान: हिंदू एकता को मिलेगा बल

इस निर्णय पर संगठन के कई वरिष्ठ सदस्यों ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि इससे हिंदू महासभा को और अधिक मजबूती मिलेगी। महासभा के पदाधिकारियों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि जितेंद्र नारायण सिंह सेंगर ने धर्मांतरण और हिंदू समाज के अधिकारों के लिए जो संघर्ष किया है, वह प्रशंसनीय है।

महासभा के अध्यक्ष स्वामी विजय नारायण भट्ट ने कहा, “हमें गर्व है कि जितेंद्र नारायण सिंह सेंगर जैसे निडर और हिंदू धर्म के प्रति समर्पित व्यक्ति को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे संगठन की ताकत और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।”

हिंदू हितों की रक्षा के लिए महासभा का संकल्प :

राष्ट्रीय संयोजक संतोष वशिष्ठ ने कहा कि महासभा का लक्ष्य हमेशा से हिंदू समाज के उत्थान और उसकी रक्षा करना रहा है। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता है कि देश में हिंदू संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक स्थलों की रक्षा हो। महासभा हिंदू हितों की रक्षा के लिए कोई भी आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी। संगठन के कुछ सदस्यों का मानना है कि यह निर्णय रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

महासभा के राष्ट्रीय महासचिव नीरज पांडेय ने कहा, “महासभा हमेशा हिंदू एकता के लिए कार्य करती आई है। यह नियुक्ति हिंदू समाज को और मजबूत करने के लिए की गई है, और हमें पूरा विश्वास है कि इससे संगठन को नई दिशा मिलेगी।”

आगे की रणनीति :

महासभा जल्द ही एक राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित करने जा रही है, जिसमें हिंदू समाज से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा होगी। महासभा ने हिंदू समाज के सभी वर्गों से एकजुट होने की अपील की है ताकि संगठन को और अधिक मजबूती दी जा सके।
“हिंदू समाज की सेवा ही मेरा जीवन समर्पण” – जितेंद्र नारायण सिंह सेंगर।

अखिल भारतीय हिंदू महासभा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने पर शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिज़वी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह सेंगर ने अपनी नियुक्ति को हिंदू समाज के उत्थान और एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने महासभा के वरिष्ठ पदाधिकारियों और राष्ट्रीय संयोजक संतोष वशिष्ठ का आभार प्रकट किया और कहा कि वे इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाएंगे।

हिंदू धर्म के लिए जीवन समर्पित करने का संकल्प :

इस अवसर पर उन्होंने कहा, “मैंने अपना पूरा जीवन हिंदू धर्म और उसकी समृद्ध संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया है। मेरी यह यात्रा केवल व्यक्तिगत आस्था की नहीं, बल्कि संपूर्ण सनातन धर्म की सेवा का एक संकल्प है। अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने जो भरोसा मुझ पर दिखाया है, मैं उसे पूरी निष्ठा और कर्मठता के साथ निभाऊंगा।”

धर्मांतरण और हिंदू हितों की रक्षा पर जोर :

उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को तोड़ने और धर्मांतरण की साजिशों के खिलाफ कड़ा संघर्ष जारी रहेगा। “आज देश के विभिन्न हिस्सों में धर्मांतरण, लव जिहाद और हिंदू आस्थाओं पर हमले हो रहे हैं। इन सभी षड्यंत्रों के खिलाफ मैं पहले भी मुखर रहा हूं और आगे भी सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद करता रहूंगा,” उन्होंने कहा।

हिंदू एकता और मंदिर संरक्षण की अपील :

उन्होंने हिंदू समाज से अपील की कि वे एकजुट रहें और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए संगठित प्रयास करें। “हिंदू महासभा का मुख्य उद्देश्य सदियों पुरानी सनातन परंपराओं की रक्षा करना और हिंदू समाज को जागरूक बनाना है। हमें अपने मंदिरों, धार्मिक स्थलों और संस्कृति की रक्षा के लिए एक साथ खड़ा होना होगा,” उन्होंने कहा।

सनातन धर्म के लिए कार्य करते रहेंगे :

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा सनातन धर्म की सेवा करना रहेगी। “मैं अपने धर्म और राष्ट्र के लिए कार्य करता रहूंगा। यह जिम्मेदारी मेरे लिए सम्मान की बात है और मैं इसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा।”
उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन, वसीम रिजवी, ने 2021 में इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाया और अपना नाम बदलकर जितेंद्र नारायण त्यागी रखा। बाद में, 2024 में, उन्होंने अपना नाम बदलकर ठाकुर जितेंद्र नारायण सिंह सेंगर कर लिया, जिससे उनकी पहचान ब्राह्मण से ठाकुर समुदाय में हो गई।

धर्म परिवर्तन के बाद, सेंगर ने प्रयागराज महाकुंभ में स्नान किया और इस्लाम छोड़कर स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाने वालों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनका संगठन ऐसे लोगों को तब तक हर महीने तीन हजार रुपये की मदद देगा, जब तक वे पूरी तरह से सनातन धर्म में स्थापित नहीं हो जाते। इसके अलावा, उन्होंने छोटे-मोटे कारोबार शुरू करने के लिए भी सहायता प्रदान करने की बात कही।

सेंगर ने अपनी अंतिम इच्छा के रूप में हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार की बात कही है। उन्होंने वसीयतनामा जारी कर अपनी चिता को अग्नि देने के लिए कुछ व्यक्तियों को अधिकृत किया है और संत रामभद्राचार्य की उपस्थिति में अपनी अस्थियों के विसर्जन की इच्छा व्यक्त की है।

इन कदमों के कारण, हिंदू समाज के कुछ वर्गों में सेंगर को सनातन धर्म के योद्धा के रूप में देखा जा रहा है। उनकी गतिविधियाँ और घोषणाएँ हिंदू समाज में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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