
नई दिल्ली।
भारतीय चुनाव आयोग ने विपक्ष के अनेक नेताओं द्वारा वोटर लिस्ट में संशोधन का विरोध करने पर कहा कि क्या फर्जी मतदाताओं को वोट डालने दें? क्या मृत मतदाताओं को भी वोट डालने दें? क्या विदेशों में जाकर बस गए लोगों की वोट भी किसी को डालने दें?
विपक्ष की तरफ से उठाए गए ‘SIR’ मुद्दे पर आयोग ने कहा कि पारदर्शी प्रक्रिया से तैयार मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव का आधार है। आयोग ने सवाल किया कि क्या संविधान का उल्लंघन करके फर्जी मतदान का रास्ता बनाना चाहिए? यह बयान विपक्ष के आरोपों और तेजस्वी यादव के बयान के बाद आया है।
चुनाव आयोग ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग अपने आलोचकों से सवाल करता है कि, “भारत का संविधान भारतीय लोकतंत्र की जननी है। तो क्या इन बातों से डरकर, निर्वाचन आयोग को कुछ लोगों के बहकावे में आकर, संविधान के विरुद्ध जाकर, पहले बिहार में, फिर पूरे देश में, मृतक मतदाताओं, स्थायी रूप से पलायन कर चुके मतदाताओं, दो स्थानों पर वोट दर्ज कराने वाले मतदाताओं, फर्जी मतदाताओं या विदेशी मतदाताओं के नाम पर फर्जी वोट डालने का रास्ता बनाना चाहिए?








