
हड्डियों को मजबूत करने, टूटी हड्डियों को जल्दी जोड़ने और जोड़ों के दर्द में राहत देने वाला प्रसिद्ध पौधा आप भी अपने घर में लगा सकते हैं। यह पौधा आपके गार्डन की शोभा बढ़ाने के साथ-साथ आपकी सेहत का भी ख़ास ध्यान रखता है। यह पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है और हड्डी जोड़ पौधा कहलाता है। जिसे पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में विशेष महत्व दिया है। इसे “हड़जोड़” या “अस्थि संधायक” नाम से भी जाना जाता है और अपने औषधीय गुणों के कारण यह बेहद लोकप्रिय है।
इसमें कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो व्यायाम के कारण जोड़ों के दर्द से पीड़ित पुरुषों में दर्द और मांसपेशियों की अकड़न को कम करने में मदद करते हैं। जोड़ों का दर्द वात दोष के असंतुलन के कारण होता है। हड़जोड़ अपने वात संतुलन और उष्ण गुणों के कारण जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करता है।
पोषण युक्त आहार न लेने की वजह से लोगों में पोषण की और केल्शियम की कमी हो जाती है।
सूखी हड़जोड़ को पीसकर पाउडर बनाकर रोज़ 1 चम्मच गर्म दूध या गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है। यह तरीका हड्डियों को ताकत देने में सबसे प्रभावशाली होता है। इसकी वजह से हड्डियों का कमजोर होना, जोड़ो में दर्द और हड्डियों के टूटने की संभावना बढ़ जाती है। खासकर उम्र बढ़ने के साथ-साथ हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। ऐसे में एक आयुर्वेदिक औषधि हड़जोड़ हड्डियों के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जा सकती है।
राजहंस चेरिटेबल अस्पताल के आयुर्वेदाचार्य डॉ श्रेय शर्मा के अनुसार हड़जोड़ में ऐसे गुण होते हैं जो टूटे हुए हड्डी के टिश्यू (tissues) को दोबारा जोड़ने में सहायक होते हैं। यह कोलेजन (Collagen) उत्पादन को बढ़ाकर हड्डियों के निर्माण की प्रक्रिया को तेज करता है। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
हड़जोड़ में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन को कम करके जोड़ों में दर्द से राहत दिलाते हैं। गठिया से पीड़ितों के लिए यह अति उत्तम होता है।
हड़जोड़ की ताजी डंठल को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में उबालकर इसमें हल्दी और सोंठ मिलाकर दिन में एक बार पिया जा सकता है। सूखी हड़जोड़ को पीसकर पाउडर बना लें और इसे रोज़ 1 चम्मच गर्म दूध या गुनगुने पानी के साथ लें। यह तरीका हड्डियों को ताकत देने में सबसे प्रभावशाली होता है।
इस जड़ी या पौधे को या ऊपर बताए गए सेवन आदि के तरीकों को अपनाने से पूर्व किसी मान्य वैद्य या अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करना चाहिए क्योंकि भिन्न भिन्न व्यक्तियों की संरचनाएं और शारीरिक क्षमताएं भिन्न भिन्न होती हैं।








