नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज और अस्थायी आजाद हिंद सरकार की स्थापना की थी, तो भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू कैसे हुए ?

21 अक्टूबर का दिन सुभाष चंद्र बोस के जीवन और भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन, 1943 में सिंगापुर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज और अस्थायी आजाद हिंद सरकार की स्थापना की थी। उन्होंने इस दिन को भारतीय इतिहास में एक नए युग की शुरुआत के रूप में मनाया था।

– *आजाद हिंद फौज की स्थापना* की, जिसका उद्देश्य भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना था।

– *अस्थायी आजाद हिंद सरकार* की स्थापना की, जिसने भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले सैनिकों और नागरिकों को एकजुट किया।

– *”तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा”* का नारा दिया, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक शक्तिशाली प्रतीक बन गया।

21 अक्टूबर का दिन भारतीय इतिहास में एक गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में अंकित है, जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व और उनकी आजाद हिंद फौज के बलिदानों को याद करता है।

अब एक अहम सवाल उठता है कि यदि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिंद सरकार की स्थापना की, तो पहला प्रधानमंत्री उन्हें क्यों नहीं माना जाए ?

आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अंतरिम सरकार की 81वीं वर्षगांठ है, अखंड भारत के प्रथम प्रधानमंत्री नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अंतरिम सरकार के बारे में कभी किताबों में उल्लेख नहीं किया गया।

कांग्रेस ने कभी नहीं चाहा कि सुभाष चंद्र बोस को लोग जाने या आने वाली पीढ़ियों को उनके बारे में पता चले कि आजादी के संग्राम के सच्चे योद्धा सुभाष चंद्र बोस ही थे, गांधी नहीं। जवाहर लाल नेहरू और एम के गांधी ने मिलकर षडयंत्र करके सुभाष चंद्र बोस को गौण कर दिया। और कहा जाता है कि उनकी जहाज क्रैश की घटना भी हमेशा संदेह के घेरे में ही रही है।

स्वाधीनता के अमृत काल के आलोक में अब समय आ गया है कि 21 अक्टूबर 1943 को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में स्थापित भारत की प्रथम स्वतंत्र अंतरिम (अस्थाई) सरकार के विषय में विस्तार से लिखा जाए और पाठ्यक्रमों में सम्मिलित कर विसंगतियों को दूर किया जाए। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में स्थापित की गई अंतरिम सरकार की 81वीं वर्षगांठ पर वर्तमान और भविष्य पीढ़ी को यह जानना आवश्यक होगा कि भारत की प्रथम स्वतंत्र सरकार कौन सी थी और प्रथम प्रधानमंत्री कौन था?

नेताजी ने इस सरकार के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा सेनाध्यक्ष तीनों का पद नेताजी ने अकेले ही संभाला। इसके साथ ही अन्य दायित्व जैसे वित्त विभाग एस.सी चटर्जी को, प्रचार विभाग एस.ए. अय्यर को तथा महिला संगठन लक्ष्मी स्वामीनाथन को सौंपा गया। उन्होंने पृथक सेना के गठन के साथ-साथ पृथक मंत्रिपरिषद भी बनाया था। उनके मंत्रिपरिषद में 18 मंत्री थे और इन सबको पृथक – पृथक विभागों का दायित्व सौंपा गया था।

उनकी इस सरकार को जर्मनी, जापान, फिलीपीन्स, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड सहित 11 देशों ने मान्यता दी। जापान ने अंडमान व निकोबार द्वीप इस अस्थायी सरकार को दे दिये। नेताजी उन द्वीपों में गये और उनका नया नामकरण किया।

30 दिसम्बर 1943 को इन द्वीपों पर स्वतन्त्र भारत का ध्वज भी फहरा दिया गया। इसके बाद नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने सिंगापुर एवं रंगून में आज़ाद हिन्द फ़ौज का मुख्यालय बनाया। 4 फ़रवरी 1944 को आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर दोबारा भयंकर आक्रमण किया जिसमें कोहिमा और पलेल आदि कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त करा लिया।

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