प्रदूषण के कारण दिल्लीवासियों की औसत आयु 10 से 12 साल कम हो सकती है, इसलिए हरियाली, पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं लोग

नई दिल्ली।

प्रदूषण के कारण दिल्लीवासियों की औसत आयु 10 से 12 साल कम हो सकती है इसलिए अब लोग हरियाली, पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं। दिल्ली एनसीआर की धुएं वाली अत्यंत प्रदूषित हवा ने अब लोगों को दूसरे शहरों में अपने लिए सेकेंड होम तलाश करने के लिए मजबूर कर दिया है।

दिल्ली में रहना अब केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि एक ‘हेल्थ इमरजेंसी’ बन चुका है, जो लोग यहां रहने को मजबूर हैं, वे तो किसी तरह अपनी जिंदगी काट रहे हैं, लेकिन संपन्न वर्ग अब इस ‘गैस चैंबर’ से निकलने का रास्ता तलाश रहा है। क्योंकि यदि जीवन ही नहीं रहेगा या स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा तो धन संपत्ति गाड़ी बंगले किस काम के?

साफ हवा की तलाश में लोग शहर को छोड़कर पहाड़ों या खुले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर के ज्यादातर निवासी प्रदूषण के कारण शहर छोड़ने पर विचार कर रहे हैं और अनेकों लोग पहले ही शहर छोड़कर स्वच्छ क्षेत्रों में जा चुके हैं।

शिकागो विश्वविद्यालय के Air Quality Life Index (AQLI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण दिल्लीवासियों की औसत आयु 10 से 12 साल कम हो सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदूषण के सीजन में हिमाचल प्रदेश के कसौली, शिमला, ऊना आदि तथा उत्तराखंड के ऋषिकेश, देहरादून में ‘सेकंड होम’ के लिए पूछताछ में 15% से 20% तक का उछाल देखा गया है. जिन लोगों के पास पैसा है,उनके लिए अब ‘लग्जरी’ का मतलब आलीशान बंगला नहीं, बल्कि ‘साफ ऑक्सीजन’ है।

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