
विश्व हाथी दिवस की शुरुआत हाथियों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों को वैश्विक स्तर पर सामने लाने के उद्देश्य से हुई। इस दिवस के जरिए हाथियों की घटती संख्या, उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा और जंगली हाथियों के सामने मौजूद खतरों को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
हाथी केवल जंगलों की शान ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने वाले महत्वपूर्ण जीव भी हैं। जंगलों में उनकी मौजूदगी पेड़-पौधों के बीजों के प्रसार से लेकर नए रास्तों और जलस्रोतों के निर्माण तक पर्यावरण के कई पहलुओं को प्रभावित करती है। दुनिया के सबसे बड़े स्थलीय जीव के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस मनाया जाता है। यह दिन हाथियों के सामने मौजूद खतरों और उनके संरक्षण की जरूरत पर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने का अवसर देता है।
भारत में हाथियों की आबादी के संरक्षण के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन जंगलों के बीच बुनियादी ढांचे का विस्तार, वन क्षेत्रों का विभाजन और मानव बस्तियों का फैलाव हाथियों के प्राकृतिक गलियारों को प्रभावित कर रहा है। इससे हाथियों को भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों या कृषि क्षेत्रों की ओर जाना पड़ता है।
भारत एशियाई हाथियों के संरक्षण के लिहाज से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में शामिल है। देश में दुनिया की 60% से अधिक जंगली एशियाई हाथी आबादी पाई जाती है। हाथी भारत का राष्ट्रीय धरोहर पशु है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत संरक्षित है।
हाथियों के संरक्षण के सामने अवैध शिकार भी एक बड़ी चुनौती रहा है। हाथीदांत के लिए हाथियों का शिकार लंबे समय से अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव अपराध से जुड़ा रहा है। कई देशों में हाथीदांत के कारोबार पर प्रतिबंध और कड़े कानून होने के बावजूद अवैध बाजार पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अवैध शिकार को रोकने के लिए कानून लागू करने के साथ सीमा पार वन्यजीव अपराध नेटवर्क पर कार्रवाई और स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी जरूरी है।









