
देश में घटिया राजनीति और वोट नीति लगभग सभी जगह देखने को मिलती है, चाहे वह कोई राज्य हो या फिर देश की राजधानी हो। दिल्ली में बेशकीमती सरकारी जमीनों पर कब्ज़ा करके झुग्गी बस्तियां बनती गईं और नेताओं के वोट बैंक तैयार होते गए। खुद नेताओं ने ही सरकारी जमीनों की लूट करवाई उन पर झुग्गी बस्तियां बनवाईं उनको बिजली पानी फ्री में दिलवाये और उन पर करदाताओं के करोड़ों रूपये लुटाये और अपना वोट बैंक बनाया। सरकार किसी भी पार्टी की रही हो लेकिन ये काम सभी ने समान रूप से किया। करदाता अपनी कमाई से टैक्स देता है ताकि सरकार विकास कार्य कर सके लेकिन लोगों की मेहनत की कमाई से दिया गया यह टैक्स का पैसा ये झुग्गी वाले और नेता डकार रहे हैं। विकास के नाम पर दिल्ली में गंदगी, हर तरफ झुग्गी बस्तियां हैं, जिनमे सभी आपराधिक गतिविधियां होती हैं।
दिल्ली विधानसभा में मंगलवार (11 अगस्त) को DUSIB संशोधन विधेयक पास हो गया। विधेयक पर चर्चा के दौरान दिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार ने दिल्ली की बदलती वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए 19 साल पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि DUSIB एक्ट में संशोधन के माध्यम से झुग्गी झोपड़ी बस्तियों की पहचान के लिए निर्धारित 1 जनवरी 2006 की कट-ऑफ तारीख को बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 किया जा रहा है।
दिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह संशोधन केवल कानून में बदलाव नहीं है, बल्कि दिल्ली के गरीब और झुग्गीवासियों को बेहतर जीवन, पक्के मकान और सम्मानजनक पुनर्वास उपलब्ध कराने की दिशा में एक ठोस कदम है। दिल्ली सरकार इन-सीटू डेवलपमेंट के मॉडल को आगे बढ़ाएगी, ताकि झुग्गीवासियों को उनके वर्तमान क्षेत्र में ही बेहतर और पक्के मकान उपलब्ध कराए जा सकें और उनके रोजगार एवं सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
लेकिन मंत्री जी ये भी तो बताने का कष्ट करें कि जिस जमीन पर ये झुग्गियां बनी हुई हैं, वो जमीन किसकी हैं? इन झुग्गी बस्तियों को मुफ्त में जो सुविधाएँ दी जा रही हैं वो किसके पैसे से दी जा रही है ? करदाताओं ने अपनी कमाई से जो टैक्स चुकाया उनका क्या कसूर है? ये सभी नेतागण अपनी जमीनों पर झुग्गी बस्तियां क्यों नहीं बनवाते हैं ? अपने घर से उन्हीं सभी मुफ्त की सुविधाएँ उपलब्ध क्यों नहीं करवाते हैं ?











