
फिरोज़ाबाद,
बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब फिरोज़ाबाद के तत्वाधान में जुलूसे मोहम्मदी (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) 2026 के लिये हाफिज़ डॉक्टर मोहम्मद अरशद रज़ाबी साहब को अध्यक्ष मनोनीत किये जाने पर वरीशा स्टूडियो कश्मीरी गेट पर उनके सम्मान में इस्तकबालिया प्रोग्राम किया गया। जिसमें बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब के शौअरा ने फूल मालाओं से उनका इस्तकबाल किया।
उनके सम्मान में नबी की शान में नाते पाक पढ़ कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उस्ताद शायर ज़ीरो बांदवी साहब ने की। मुख्य अतिथि हाफ़िज़ नाज़िम और जुलूसे मोहम्मदी के सैक्रेटरी हाफ़िज़ आदिल थे। नातिया प्रोग्राम का आग़ाज़ हाफ़िज़ आदिल ने ये शेर पढ़ कर किया।
“जिस पे मेरे नबी का करम हो गया
वो बड़ा मोहतरम मोहतरम हो गया ”
मंज़र नवाब ने नबी की शान यूं बयां की
“बलऔ से नहीं डरते ये मस्ताने मोहम्मद के
हर एक तूफान से टकराते हैं दीवाने मोहम्मद के
सीनियर शायर क़मर वारसी ने यूं कहा
.”ज़द में तूफान के है सफीना ,
हो मदद अब तो शाहे मदीना
सारे आलम में यूं है मदीना,
हो अंगूठी में जैसे नगीना”
हाजी ऐजाज़ सिद्दीकी ने पढ़ा—-
” दिल में है आरज़ू मदीने की
वरना ख़्वाहिश नहीं है जीने की”
बज़्म के सदर असलम अदीब ने यूं पढ़ा —-
” नदी हम हैं समंदर आप ही हैं ,
हमारे दिल के अंदर आप ही हैं
मुकम्मल दीन पहुंचाया है जिसने,
ख़ुदा के वो पयम्बर आप ही हैं”
कलीम नूरी ने नात का शेर यूं पढ़ा —
” खुदा खुद नात पढ़ता है पयम्बर नात पढ़ते हैं
मोहम्मद की फ़लक सहारा समंदर नात पढ़ते हैं”
उस्ताद शायर ज़ीरो बांदवी साहब ने यूं पढ़ा —
मदीने में जाने को जी चाहता है
फ़साना सुनने को जी चाहता है
मोहम्मद मोहम्मद मोहम्मद मोहम्मद
यही गुनगुनाने को जीजा चाहता है
हाफ़िज़ डा० मुहम्मद अरशद रज़ावी ने नात का शेर पढ़ा
” मोहम्मद का मीलाद होता रहेगा
ख़ुदा अहले सुन्नत को आबाद रखे।
अन्त में हाफ़िज़ डॉक्टर मुहम्मद अरशद रज़ावी साहब ने बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब के सभी मैम्मर का शुक्रिया अदा किया। और कहा कि जुलूसे मोहम्मदी 2026 के लिए प्रशासन में जो गाइड लाइन जारी की है मैं तमाम शहर वासियों से यह गुजारिश करता हूं के जो लोग भी जुलूस में शामिल हो वह प्रशासन की गाइड लाइन का पालन ज़रूर करें। और जुलूस के साथ चलें इधर-उधर गलियों में अकेले जाने की ज़रूरत नहीं है। इसलिए जुलूस में शामिल होने वालों से गुजारिश है कि वह हमारा सहयोग करें।और सादगी के साथ अपना योगदान दें।
बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब के सद्र असलम ने कहा कि हम हाफ़िज़ डॉक्टर मोहम्मद अरशद साहब के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने हमें टाइम दिया और अपना इस्तकबाल करने का हमें मौका दिया ।हम तहे दिल से उनका शुक्र अदा करते हैं और हमारी दुआ है कि अल्लाह हर कदम पर हाफिज डॉक्टर मोहम्मद अरशद रज़ाबी साहब को कामयाबी अता फरमाए।
कार्यक्रम में असलम खान, अलफैज़ खान, नवाब अदनान, शाद भाई, इसरार खान, डॉक्टर अनीस, गुलफाम, रफीक, कामरान, फ़ीरोज़ आदि उपस्थित रहे।








