
अनुवाद केवल एक भाषा के शब्दों को दूसरी भाषा में बदलने का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों, भावनाओं, ज्ञान और सांस्कृतिक अनुभवों को एक समाज से दूसरे समाज तक पहुंचाने वाला सशक्त सेतु है। आज व्यापार, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, साहित्य, पत्रकारिता, कूटनीति और डिजिटल संचार ने दुनिया को पहले से कहीं अधिक करीब ला दिया है। इसके बावजूद भाषाई विविधता मानव सभ्यता की महत्वपूर्ण पहचान बनी हुई है। इस विविधता के बीच परस्पर समझ और संवाद स्थापित करने में अनुवाद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वह साहित्य और ज्ञान को भाषाई सीमाओं से मुक्त करता है तथा विभिन्न संस्कृतियों और सभ्यताओं को एक-दूसरे से परिचित कराता है।
अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस के लिए 30 सितंबर की तारीख का चयन ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह दिन संत जेरोम की स्मृति से जुड़ा है, जिन्हें अनुवादकों का संरक्षक माना जाता है। संत जेरोम ने बाइबिल के बड़े हिस्से का लैटिन में अनुवाद किया था। उन्हें ग्रीक और हिब्रू सहित कई भाषाओं का ज्ञान था और उन्होंने अपने समय में धार्मिक ग्रंथों को व्यापक पाठक समुदाय तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका निधन 30 सितंबर 420 ईस्वी को बेथलेहम में हुआ था।
भारत में अनुवाद का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां भाषाई विविधता केवल विदेशी भाषाओं के संदर्भ में नहीं, बल्कि देश के भीतर ही अत्यंत व्यापक है। हिंदी भाषी पाठक के लिए तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बाग्ला, असमिया, मराठी, गुजराती, उड़िया, पंजाबी, कश्मीरी, मैथिली, संथाली और अन्य भाषाओं का श्रेष्ठ साहित्य अनुवाद के माध्यम से उपलब्ध होता है। इसी प्रकार भारतीय भाषाओं के पाठक विश्व साहित्य से भी परिचित होते हैं। टॉल्स्टॉय, दोस्तोयेव्स्की, शेक्सपियर, मार्केज और अन्य विश्व साहित्यकारों की रचनाओं ने अनुवाद के माध्यम से भारत के पाठकों के बीच व्यापक प्रभाव पैदा किया। दूसरी ओर प्रेमचंद, रवींद्रनाथ ठाकुर, महादेवी वर्मा, फणीश्वरनाथ रेणु, निर्मल वर्मा और अनेक भारतीय रचनाकारों की कृतियां अनुवाद के जरिए देश और दुनिया के अलग-अलग भाषाई समुदायों तक पहुंचीं। इस तरह अनुवाद साहित्य को सीमाओं से मुक्त करता है।
अनुवाद की जरूरत स्कूली शिक्षा तक सीमित नहीं है। उच्च शिक्षा में विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कानून, अर्थशास्त्र और सामाजिक विज्ञान की सामग्री का भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होना ज्ञान के व्यापक प्रसार के लिए महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में बड़ी मात्रा में शोध अंग्रेजी और अन्य अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में प्रकाशित होता है। यदि उसका गुणवत्तापूर्ण अनुवाद भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हो, तो शोध और विशेषज्ञ ज्ञान की पहुंच व्यापक पाठक वर्ग तक बढ़ सकती है। इसी तरह भारतीय भाषाओं में मौजूद साहित्य और ज्ञान का अंग्रेजी तथा अन्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद भारत के बौद्धिक और सांस्कृतिक योगदान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का माध्यम बन सकता है।









