
महाराष्ट्र में सोलापुर जिले के तुलशी गांव के ग्रामीणों ने अब अपना पूरा गांव ही बेचने का ऐलान कर दिया है। गांव में जगह-जगह ‘यह गांव बिकाऊ है, कीमत पानी’ के बैनर लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार उन्हें पीने और खेती के लिए पानी उपलब्ध नहीं करा पा रही है, इसलिए वे गांव बेचने को मजबूर हैं।
करीब 7 हजार की आबादी वाला तुलशी गांव आज पानी के लिए संघर्ष कर रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि सीना-माढा परियोजना का अधूरा काम जल्द पूरा किया जाए और गांव को पीने तथा सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए। एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और जलापूर्ति की योजनाओं पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी तरफ सोलापुर का तुलशी गांव पानी के लिए अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि गांव के पास से सीना-माढा सिंचाई परियोजना की नहर गुजरती है, लेकिन पिछले 26 साल से अधूरे पड़े काम के कारण ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। पानी की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने ग्रामसभा में गांव बेचने का प्रस्ताव पारित करने का भी दावा किया है।
गांव में पीने के पानी से लेकर खेती और पशुओं के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं है, कुएं और जलस्रोत सूख चुके हैं। ग्रामीणों को पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। बारिश की कमी ने पहले से ही गंभीर जल संकट को और बढ़ा दिया है। खेतों में फसलें प्रभावित हो रही हैं।
सरकार की जल जीवन मिशन योजना के तहत गांव में काम किए जाने के बावजूद ग्रामीणों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। स्थानीय जलस्रोत सूखने के कारण पानी की समस्या लगातार बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पानी की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। यही वजह है कि ग्रामीणों ने अब गांव बेचने का बोर्ड लगाकर अपना आक्रोश जाहिर किया है।












