
बुधवार को होने जा रही जीएसटी काउंसिल की बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। इन प्रस्तावों का मकसद सिर्फ टैक्स नियमों को आसान बनाना नहीं है, बल्कि कंपनियों के अटके पड़े हजारों करोड़ रुपये निकालना भी है। सबसे खास बात ये है कि जीएसटी कानून के तहत गिरफ्तारी के डर को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है।
काउंसिल की इस बैठक में रजिस्ट्रेशन से लेकर रिटर्न फाइलिंग, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट और मुकदमों तक से जुड़े नियमों की समीक्षा होगी। शुरुआती सालों में जो कड़े नियम और पाबंदियां लगाई गई थीं, उन्हें अब ढीला किया जा सकता है। सिस्टम अब पूरी तरह डेटा और तकनीक पर आधारित हो चुका है। जानकारों का कहना है कि अब कागजी जांच-पड़ताल की जगह ऑटोमेटेड और रिस्क-आधारित व्यवस्था काम करेगी।
प्रस्ताव के तहत प्लांट, मशीनरी और इनपुट सर्विसेज पर चुकाए गए टैक्स को पांच साल में मासिक किस्तों के जरिए रिफंड करने पर विचार किया जाएगा। अब तक कंपनियां इस रकम को आईटीसी के जरिए वापस नहीं ले पाती थीं। इसके अलावा धारा 17(5) के तहत बंद की गई कई टैक्स छूट को फिर से खोलने की योजना है. इसमें कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, आउटडोर कैटरिंग, टेलीकॉम टावर, फैक्ट्रियों के बाहर बिछाई गई पाइपलाइन, मुफ़्त सैंपल और एक्सपायर होकर नष्ट होने वाले सामान पर टैक्स क्रेडिट शामिल है. 13 सीटों तक वाली गाड़ियों, उनके इंश्योरेंस, मेंटेनेंस और गाड़ियों को लीज पर लेने पर भी क्रेडिट देने का प्रस्ताव है.
ईवाई के पार्टनर बिपिन सपरा के मुताबिक, धारा 17(5) के तहत ब्लॉक क्रेडिट को अनलॉक करने से उद्योगों की लागत घटेगी और भारतीय सामान दुनिया भर में मुकाबला कर सकेंगे. इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत फंसे पैसे को रिफंड करने से कंपनियों की अटकी पूंजी ग्रोथ कैपिटल में बदल जाएगी. ये बिना किसी नई सब्सिडी के इंडस्ट्री को पीएलआई स्कीम जैसा सहारा देगा. टेलीकॉम टावर और पाइपलाइन पर क्रेडिट मिलने से टेलीकॉम, पेट्रोकेमिकल, फर्टिलाइजर, गैस डिस्ट्रीब्यूशन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को भारी राहत मिलेगी. फूड, फार्मा, टेक्सटाइल और ईवी जैसे 5% टैक्स स्लैब वाले सेक्टरों में हजारों करोड़ का आईटीसी फंसा है, जो छूट मिलने पर नए निवेश में बदल सकता है











