8 अक्‍टूबर को बन रहे 5 शुभ योग, 4 राशियों पर बरसेगी भोले शंकर की कृपा

आज प्रदोष व्रत रखा जाएगा, साथ ही मासिक शिवरात्रि भी मनाई जाएगी। गुरुवार होने से यह गुरु प्रदोष व्रत है। इसके अलावा ब्रह्म योग और शुक्‍ल योग का शुभ संयोग भी बन रहा है। इसके अलावा बुद्धि के दाता बुध और धन देने वाले ग्रह शुक्र युति दृष्टि योग बना रहे हैं। इतने सारे शुभ योगों का बनना लोगों की किस्‍मत पर भी असर डाल रहा है। जानिए आज शिव कृपा से किन 4 राशि वालों के भाग्‍य खुलने जा रहे हैं।

कर्क राशि: शुभ ग्रह गुरु कर्क राशि में हैं और आज गुरु प्रदोष का संयोग बन रहा है। चंद्रमा भी कर्क राशि के लिए शुभ फलदायी है। इससे कर्क राशि वालों को अधिक लाभ हो सकता है, अचानक कोई अच्‍छा मौका हाथ लग सकता है।

कन्या राशि: ग्रहों के राजा सूर्य इस समय कन्या राशि में हैं। आज बन रहे योग कन्‍या राशि वालों के लिए अनुकूल स्थितियां बना रहे हैं। इन लोगों को धन लाभ हो सकता है. मीठा बोलकर कोई काम बनवा लेंगे। संपर्क से लाभ हो सकता है।

तुला राशि: तुला राशि वालों के लिए समय अच्‍छा बना हुआ है। तुला राशि में बुद्धि, वाणी, व्‍यापार के कारक बुध और धन-समृद्धि के दाता शुक्र ग्रह युति करके लक्ष्‍मी नारायण योग बना रहे हैं। जो आपको आकर्षण दे रहा है, धन-संपत्ति के योग बना रहा है। आज कोई महत्‍वपूर्ण बातचीत हो सकती है या डील पक्‍की हो सकती है। सामाजिक संपर्क भी बढ़ेगा।

मीन राशि: मीन राशि वालों के लिए भी दिन अच्‍छा है। धैर्य रखने का मीठा फल मिलेगा।रुके हुए काम बनेंगे। आप पर यदि कोई बड़ी जिम्‍मेदारी थी, तो वह पूरी हो सकती है, जिससे आप राहत महसूस करेंगे।

गुरुवार का व्रत और भगवान विष्णु की पूजा भी की जाएगी। आज त्रयोदशी श्राद्ध भी है, इसलिए धार्मिक दृष्टि से आज का दिन काफी खास माना जा रहा है। आज आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि है। पंचांग के अनुसार पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र, गर करण, शुक्ल योग और सिंह राशि में चंद्रमा रहेगा। आज दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा।

पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि 8 अक्टूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। पंडित कमलेश पाठक बताते हैं कि मासिक शिवरात्रि में भगवान शिव की पूजा चतुर्दशी तिथि में ही करने का विधान है। इसलिए शिवरात्रि की पूजा रात में चतुर्दशी तिथि लगने के बाद करना शुभ माना जाएगा। जब त्रयोदशी तिथि गुरुवार के दिन पड़ती है, तो उसे गुरु प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरु प्रदोष के दिन भगवान शिव के साथ देवगुरु बृहस्पति की पूजा और ध्यान करने से ज्ञान, सद्बुद्धि और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं। साथ ही आर्थिक स्थिति मजबूत होने और रुके हुए काम पूरे होने की कामना भी की जाती है। गुरु प्रदोष का संबंध केवल मनोकामना पूर्ति से नहीं है, बल्कि यह दिन व्यक्ति को संयम, सात्विकता और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है।

SHARE