अब दुनिया में बिजली, चिप, सेना, साइबर सुरक्षा, उद्योग और 21वीं सदी की आर्थिक ताकत की लड़ाई बन चुका है “ए आई”

अमेरिका और चीन के बीच एआई की जंग अब सिर्फ मॉडल्स और चिप्स तक सीमित नहीं है। बिजली, डेटा सेंटर, पूंजी, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर इस दौड़ के निर्णायक आधार बन चुके हैं। दोनों देश वैश्विक एआई बढ़त के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। सवाल अब यह नहीं कि सबसे अच्छा चैटबॉट किसके पास है। असली सवाल है कि कौन देश अरबों लोगों और लाखों मशीनों तक एआई को सबसे तेजी से पहुंचा सकता है।

जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने बैठते हैं, तो चर्चा व्यापार, टैरिफ, ताइवान और रेयर अर्थ्स तक सीमित नहीं रहती। अब मेज पर एक और मुद्दा है, जो आने वाले दशकों में इन बाकी मुद्दों से भी बड़ा साबित हो सकता है “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस”। सितंबर 2026 की ट्रंप-शी वार्ता से पहले अमेरिकी और चीनी अधिकारियों के बीच एआई पर अलग बातचीत शुरू हो चुकी है। अमेरिका ने गंभीर एआई इंसिडेंट्स की स्थिति में दोनों देशों के बीच नोटिफिकेशन मैकेनिज्म बनाने का प्रस्ताव भी रखा है।

दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियां एक विचित्र स्थिति में हैं। वे एआई में एक-दूसरे को पीछे छोड़ना चाहती हैं, लेकिन साथ ही यह भी समझने लगी हैं कि अनकंट्रोल्ड एआई कॉम्पिटिशन स्वयं नेशनल-सिक्योरिटी रिस्क बन सकती है। कुछ साल पहले तक एआई रेस काफी एकतरफा दिखाई देती थी। ओपनएआई, गूगल, एंथ्रोपिक, मेटा, एनवीडिया, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी कंपनियों के कारण अमेरिका के पास मॉडल्स, चिप्स, क्लाउड और कैपिटल में भारी बढ़त थी, वह बढ़त आज भी खत्म नहीं हुई है।

स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स 2026 के मुताबिक 2025 में अमेरिकी संस्थानों ने 59 नोटेबल एआई मॉडल्स तैयार किए, जबकि चीन ने 35। फरवरी 2025 में डीपसीक-आर1 ने कुछ इवैल्यूएशंस में शीर्ष अमेरिकी मॉडल की बराबरी कर ली थी और मार्च 2026 तक टॉप अमेरिकन और चाइनीज मॉडल्स के बीच मेजर्ड परफॉर्मेंस गैप सिर्फ 2.7 प्रतिशत रह गया था। स्टैनफोर्ड का निष्कर्ष है कि यूएस-चाइना मॉडल परफॉर्मेंस गैप प्रभावी रूप से लगभग बंद हो चुका है, यही वॉशिंगटन की चिंता का केंद्र है।

अमेरिका अभी फ्रंटियर पर आगे है, लेकिन चीन को पहले जैसी कई वर्षों की दूरी पर मानना अब मुश्किल है। पैसा अमेरिका का सबसे बड़ा हथियार है। कैपिटल के मामले में अंतर अभी बहुत बड़ा है। 2025 में अमेरिका में प्राइवेट एआई इन्वेस्टमेंट लगभग ₹27.30 लाख करोड़ रहा। चीन में यह लगभग ₹1.18 लाख करोड़ था। यानी अमेरिकी प्राइवेट इन्वेस्टमेंट चीन के मुकाबले करीब 23 गुना था। अमेरिका में अकेले जनरेटिव एआई में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट लगभग ₹15.62 लाख करोड़ के आसपास था। 2025 में वहां 1,953 नई फंडेड एआई कंपनियां थीं, जबकि चीन में 161, लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण कैविएट है।

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