फिरोजाबाद।

सामाजिक व साहित्यिक संस्था बज़्मे फ़रोग़े अदब फिरोजाबाद के तत्वाधान में बालीवुड के मशहूर ओ मारूफ़ आर्टिस्ट व शायर‌ जनाब आफ़ताब अजमेरी साहब के‌ शेअरी ‌मजमुआ “आफ़ताब की किरनें ” का रस्मे इजरा (विमोचन) आगरा ताज नगरी ‌फेज़ 2 के ओरचिड ग्रीन ‌होटल‌ में 12 अक्टूबर की रात्रि में किया गया। इस मौके न पर एक अजीमुश्शान मुशायरे का आयोजन भी किया गया जिसमें ‌हिन्दुस्तान के कई मशहूर शायरौं ने अपना कलाम पेश कर समां बांध दिया
मुशायरे की सदारत शहर की मुअज़्ज़ि शख्सित जनाब एन के अब्बास साहब ने की और शमां रौशन महमाने खू़सूसी जनाब आफ़ताब अजमेरी ने की ।
निज़ामत के फ़राइज़ उस्ताद ज़ीरो बांदवी ने दिये,
मुशायरे का आगा़ज़ कलीम नूरी की हम्दे पाक और तरन्नुम ‌के बा कमाल शायर अनवर अमान की नाते नबी से हुआ उसके बाद मन्ज़ऱ नवाब‌ ने शेअर पढ़ते हुए कहा-
، “ये सिर्फ़ अपनी हंसी को हंसी समझते हैं
हंसी का इनका कभी ऐतबार मत करना”
मशहूर ओ मारूफ़ शायर कलीम नूरी ने हालाते हाज़रा की अक्कासी करते हुए कहा–
“शजर चारौ तरफ़ से जल रहा है
परिंदा क्यूं कोई उड़ता नहीं है ”
उनका ये शेअर भी खूब पसंद किया गया
“रोज़ मुझ में चिताऐं जलती हैं
एक शमशान हो गया हूं मैं ”
अकबराबाद के मशहूर शायर अनवर अमान ने कई ग़ज़लें पढ़ीं
उनका ये शेअर बार बार सुना गया—-
“है आसमां से तुम्हारी रन्जिश ज़मीं से है दुश्मनी तुम्हारी –
तुम आसमानो ज़मीं से निकले तो ये बताओ कहां रहोगे”
उन्होंने ये शेर पढ़ कर श्रोताओं के वाह करने पर मजबूर कर दिया।
” हमने देखा है सफर में रोटी माँ के हाथ की
बासी हो जाती है लेकिन से मज़ा होती नहीं ”
शायरा शमीम कौसर ने कई गीत और ग़ज़लें पढ़ीं उनका ये शेअर बार बार सुना गया-
” चलीं जो यूं ही नफ़रतों की हवाऐं-
गुलों में कहां शादमानी रहेगी ”
बज़्मे फ़रोग़े अदब के सद्र ने‌ ये शेअर पढ़ कर समां बांध दिया’ जिसे अपनी हिदायत से ख़ुदा महरूम रखता है-
उसे ज़ौके़ इबादत से ख़ुदा महरूम रखता है
मशहूर मिज़ाह निगार ज़ीरो बांदवी का ये शेअर खू़ब पसंद किया गया-
” मुर्ग़ी जवान हो गयी जब से पड़ोस की-
सब इस जुगाड़ में हैं कि कैसे हलाल हो”
उन्होंने अपनी शायरी से श्रोताओं को खूब हंसाया।
साहिबे जश्न आफ़ताब अजमेरी ने कई ग़ज़लैं व नज़्में पढ़ीं उन्होंने समाज को पैग़ाम देते हुए कहा-
“मुहब्बत के रिश्ते मुहब्बत से जोड़ों
किसी बात पर दिल किसी का न तोड़ो”
उनकी नज़्म का ये शैअर बहुत पसंद किया गया
“अगर जंग होती रही नागहानी
न दुनिया रहेगी न इस की कहानी”
जानी मानी शख्सियत जनाब एडवोकेट ऐन के अब्बास ने ये शेअर पढ़ कर सब का दिल जीत लिया उन्होंने ने कहा –
“सहर‌ से शाम गुज़री रात भी ढलने ही वाली है
मैं यादों के उजालों में समा जाऊं तो अच्छा है”
अन्य शायरों ने अपने कलाम पर खूब वाह-वाह लूटी।
मुशायरा देर रात तक चला अन्त में बज़्मे फ़रोग़े अदब के सद्र असलम अदीब ने आफ़ताब अजमेरी साहब को मोमेंटो पेश करते हुए कहा कि बज़्मे फ़रोग़े अदब हमेशा बिला किसी तफ़रीक़ के अदब और शौअरा की हौसला अफ़ज़ाई करती रही है।

इसी सिलसिले में आज आफ़ताब अजमेरी साहब को ऐज़ाज़ दिय गया हम आफ़ताब अजमेरी साहब के ममनूनो मशकूर हैं कि उन्हों ने अपना की़मती वक्त दिया आफ़ताब अजमेरी साहब ने ख़ुशी इज़हार करते हुए कहा कि बज़्मे फ़रोग़े अदब का ये इन्तिहाई खू़बसूरत और कामयाब प्रोग्राम हमेशा मेरे ज़ेहन ओ दिल पर तारी रहेगा मैं जनाब असलम अदीब और बज़्म के तमाम अराकीन का तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूं, इस मौक़े पर आफ़ताब साहब की अहलिया मौहतरमा शहज़ादी सालिहा भी मौजूद रहीं ।

प्रोग्राम को कामयाब बनाने में जनाब अनवर अमान अकबराबादी , मन्ज़र नवाब, मु इश्तयाक़ , जनाब एन के अब्बास, मशहूर शायरा शमीम कौसर साहिबा का बहुत बड़ा किरदार रहा। आसिफ खान,साहिल,शानू अली, लियाकत अली, जलाल भाई, शाहरोज़ खान आदि की उपस्थिति सराहनीय रही।

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