सिंधी समाज की पूज्य माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती पर 22 अक्टूबर को रायपुर में ऐतिहासिक आयोजन, 200 रुपए का स्मारक सिक्का जारी

सिंधी समाज की पूज्य माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती पर 22 अक्टूबर को रायपुर में ऐतिहासिक आयोजन किया जा रहा है। उनके सम्मान में 200 रुपए का स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया जाएगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोक भवन में आयोजित समारोह में इसका विमोचन करेंगी। 317 वर्ष पुराने शदाणी दरबार की पंचम पीठाधीश रहीं माता हासी देवी ने अपना संपूर्ण जीवन भक्ति, सेवा, शिक्षा और मानव कल्याण को समर्पित किया था। इसी योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिया जा रहा है।

शदाणी दरबार के सचिव उदय साईं के अनुसार यह स्मारक सिक्का कोलकाता टकसाल में तैयार किया गया है। सिक्के का वजन 35 ग्राम रखा गया है, जिसमें 50 प्रतिशत चांदी, 40 प्रतिशत तांबा, 5 प्रतिशत निकल और 5 प्रतिशत जस्ता का उपयोग किया गया है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने इस विशेष स्मारक सिक्के के 550 सिक्कों का निर्माण कराया है। विमोचन के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक शदाणी दरबार की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से इसकी बुकिंग कर सकेंगे।

पूज्य माता साहिब हासी देवी सिंधी समाज की महान आध्यात्मिक संत और रायपुर स्थित शदाणी दरबार की पंचम पीठाधीश थीं। उनका जन्म वर्ष 1826 में सिंध प्रांत के खानपुर महर में हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक जीवन की ओर था। सन 1852 में मात्र 26 वर्ष की आयु में वे शदाणी दरबार की पहली महिला पीठाधीश्वर बनीं। उन्होंने लगभग 57 वर्षों तक धार्मिक और सामाजिक कार्यों का नेतृत्व किया।

उनसे जुड़ी मान्यता है कि अकाल के कठिन समय में भी उनके आशीर्वाद से अन्न भंडार कभी खाली नहीं हुआ। इसी कारण उन्हें सिंधी समाज में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाता है। 30 अप्रैल 1909 को उन्होंने देह त्याग किया, लेकिन उनकी शिक्षाएं आज भी सेवा, मानवता और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाती हैं।

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