-लापरवाही बरतने से गर्भस्थ बच्चे पर भी पड़ सकता है असर-एनीमिया से बचने के लिए प्रोटीन व आयरनयुक्त भोजन का करें सेवन बांका, 31 मार्च- गर्भवती महिलाओं को एनीमिया को लेकर विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। इससे न सिर्फ उनपर प्रभाव पड़ता है, बल्कि गर्भस्थ बच्चे पर भी इसका असर पड़ता है। दरअसल, गर्भवती महिलाओं को गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए शरीर में रक्त का निर्माण करना पड़ता है। इसमें कमी होने के कारण एनीमिया होने की प्रबल संभावना हो जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को गर्भ के दौरान लगातार हीमोग्लोबिन समेत अन्य आवश्यक जांच करानी चाहिए एवं चिकित्सकों के परामर्श का पालन करना चाहिए।शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि एनीमिया की बीमारी खून की कमी से होती है। इसलिए इससे बचने के लिए आयरनयुक्त भोजन का सेवन जरूरी है। शरीर में पर्याप्त मात्रा में आयरन रहने से इस बीमारी के होने की संभावना न के बराबर रहती है। इसलिए, खान-पान एवं रहन-सहन का विशेष ख्याल रखें। यह बीमारी खून में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं या हीमोग्लोबिन कम होने से होती है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराएं और चिकित्सक द्वारा दिए गए चिकित्सकीय परामर्श का भी पालन करें। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी मुसीबत और परेशानी का सबब बन सकती है। इससे घबराने की भी जरूरत नहीं है। ऐसे में समय पर जांच के लिए अस्पताल जाने एवं चिकित्सकों की सलाह का पालन करना चाहिए। जो आगे की मुसीबत उत्पन्न नहीं होने देगी, आपके लिए फायदेमंद साबित होगा तथा आसानी के साथ आपको बीमारी से छुटकारा मिल सकता है। गर्भवती महिलाओं को एनीनिया को लेकर खासा सतर्क रहना चाहिए।ये हैं लक्षणः डॉ. चौधरी ने बताया कि एनीमिया बीमारी का शुरुआती लक्षण थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला होना, दिल की धड़कन में बदलाव, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, सीने में दर्द, हाथों और पैरों का ठंडा होना, सिरदर्द आदि होना है। ऐसा लक्षण होते ही ससमय इलाज कराएं। एनीमिया के दौरान पालक, सोयाबीन, चुकंदर, लाल मांस, मूंगफली, मक्खन, अंडे, टमाटर, अनार, शहद, सेब, खजूर आदि प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करें। जो आपके शरीर की कमी को पूरी करता एवं हीमोग्लोबिन जैसी कमी भी दूर होती है। इससे आपको एनीमिया बीमारी से बचाव मिल सकता है।चिकित्सकों की सलाह का करें पालन: डॉ. चौधरी ने बताया कि एनीमिया के दौरान आप तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से दिखाएं एवं चिकित्सकों के अनुसार आवश्यक जांच कराएं। इसके बाद चिकित्सकों द्वारा दी गई आवश्यक चिकित्सा परामर्श का पालन करें, जो आपके लिए फायदेमंद साबित होगा। एनीमिया से बचाव के लिए समय पर खाना भी जरूरी है। इसलिए इस बात का विशेष ख्याल रखें कि समय पर खाना खाएं और परिवार के अन्य सदस्यों के भी खान-पान का ख्याल रखें। खासकर घर के बच्चे और बुजुर्गों के खान-पान को लेकर विशेष ख्याल रखें।
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