-सदर में टीबी मरीज का निःशुल्क मिला है इलाज : संचारी रोग पदाधिकारी
पूर्व में निजी अस्पताल से टीबी मरीज के नहीं आने पर लिया गया था संज्ञान
लखीसराय।
जिले के सदर अस्पताल में निजी अस्पताल से टीबी मरीज को सदर अस्पताल में निःशुल्क इलाज के लिए भेजा जा रहा है। जो लोग अपने इलाज हेतु इधर -उधर भटक जाते थे या कहीं निजी अस्पताल में अधिक लागत होने के कारण इलाज नहीं करा पाते थे ,ऐसे लोगों को पोषण राशी भी नहीं मिल पाती थी, वो लोग अब इस संक्रमित बीमारी का ईलाज करवा रहे हैं साथ ही पोषण राशी भी मिल जा रही है।
इस बात की जानकारी देते हुए जिला संचारी -रोग पदाधिकारी डॉ श्रीनिवाश शर्मा ने बताया की पूर्व में इस विषय पर हमलोगों ने निजी अस्पताल के डॉक्टर के साथ बैठक कर इस विषय पर ध्यान आकर्षित किया जिसका परिणाम बहुत ही अच्छा मिल रहा है।
उन्होंने बताया की टीबी मुक्त भारत निर्माण को लेकर केंद्र से लेकर जिला स्तर का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सजग और संकल्पित है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए हर जरूरी पहल की जा रही है।
जिले में निजी अस्पताल से टीबी के इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या अब तक 166 है जो मार्च महीने 2024 से अबतक 2025 का आकंडा है। डॉ शर्मा ने बताया की टीबी कोई लाइलाज बीमारी बीमारी नहीं है। लेकिन अक्सर हम इसके पहचान और इलाज में देरी कर जाते हैं। जिससे कारण ये कई बार जानलेवा भी बन जाती है। इसके लिए आशा को निर्देश दिया गया है की जब भी वो अपने क्षेत्र में गृह -भ्रमण के लिए जाती हैं तो टीबी के संदिग्ध मरीजों को हेल्थ एंड वेलनेस केंद्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इलाज के लिए भेजें।
ये हैं टीबी के लक्षण :
– भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना
– बेचैनी एवं सुस्ती छाई रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट रहना व रात में पसीना आना.
– हलका बुखार रहना
– लगातार खांसी आते रहना एवं खांसी में बलगम आना तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना
– गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना
– गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि
– आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं
– पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं
– टीबी न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी







