बेगुनाहों की जान लेना पाप है और जो भी इस तरह की कायराना हरकत करता है वो मुसलमान कहलाने लायक नहीं है – सैयद जैनुल आबेदीन, अजमेर शरीफ़

अजमेर।

बेगुनाहों की जान लेना पाप है और जो भी इस तरह की कायराना हरकत करता है वो मुसलमान कहलाने लायक नहीं है। कश्मीर नरसंहार घटना पर अजमेर शरीफ़ दरगाह के प्रमुख सैयद जैनुल आबेदीन ने बडा बयान दिया है। उन्होंने इस आतंकी हमले की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा, “इस कायराना हरकत की इस्लाम में कोई जगह नहीं है। हमारे मजहब की जो तालीम है, शिक्षा है, उसके अनुसार अगर एक भी मासूम का कत्ल किया जाता है, तो वह इंसानियत का अपमान है। इस तरह की घटनाओं से धर्म और इस्लाम बदनाम होते हैं, जबकि इस्लाम ऐसी हिंसा सिखाता ही नहीं है”

दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी का बयान सामने आया है। उन्होंने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ‘पहलगाम में बेगुनाह लोगों की हत्या ने हमारी अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। पूरा देश इस जघन्य वारदात की एक स्वर में निंदा करता है’

शाही इमाम ने कहा, “मजहब के नाम पर बेगुनाहों का कत्ल करना एक ऐसा जुर्म है जो माफ करने लायक नहीं है।” उन्होंने इसे ‘नाकाबिल-ए-माफी जुर्म’ करार देते हुए कहा कि ऐसे दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

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