“विश्व वरिष्ठ नागरिक दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस” : 15 जून, वृद्धजन समाज की जीवित स्मृति, सांस्कृतिक विरासत और नैतिक चेतना के संवाहक हैं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बुजुर्गों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को रोकने, इसके प्रति लोगों को सचेत करने के उद्देश्य से “विश्व वरिष्ठ नागरिक दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस : 15 जून” की नींव वर्ष 2006 में रखी। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आधिकारिक रूप से 2011 में मान्यता इसे मान्यता दी गई। इसका मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार, उपेक्षा और भेदभाव के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना है।

आज जब विश्व तेजी से वृद्ध समाज की ओर बढ़ रहा है, तब वृद्धजनों के अधिकारों की रक्षा केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि नैतिक दायित्व और मानवीय उत्तरदायित्व भी बन गई है। इस दिवस को मानाने का उद्देश्य वृद्धजनों के विरुद्ध होने वाली हिंसा, उपेक्षा, आर्थिक शोषण और भावनात्मक उत्पीड़न के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनके सम्मान, सुरक्षा और गरिमा की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।

वृद्धजन किसी भी समाज की जीवित स्मृति, सांस्कृतिक विरासत और नैतिक चेतना के संवाहक हैं। उनके साथ कोई भी दुर्व्यवहार न हो, उन्हें मानसिक, शारीरिक, आर्थिक हानि न पहुँचे, ये सुनिश्चित करना हम सबकी जिम्मेदारी बनती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बुजुर्गों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को कई श्रेणियों में बांटा जा सकता है। शारीरिक दुर्व्यवहार: मारपीट करना, चोट पहुंचाना, या दवाइयां और भोजन देने में लापरवाही करना। भावनात्मक उत्पीड़न: अपमान करना, डराना-धमकाना, या परिवार के फैसलों से अलग रखना। आर्थिक शोषण: वृद्धजनों की पेंशन, संपत्ति या बैंक खातों का उनकी इच्छा के विरुद्ध उपयोग करना। उपेक्षा: आवश्यक देखभाल, स्वास्थ्य सुविधाओं और भावनात्मक सहयोग से वंचित रखना।

वृद्ध व्यक्ति वह पुस्तक है जिसके प्रत्येक पृष्ठ पर जीवन के संघर्ष, सफलताएं, असफलताएं, त्याग और धैर्य की कहानियां अंकित होती हैं। उनके सफेद बाल केवल आयु का संकेत नहीं, बल्कि अनुभव के चांदी जैसे मुकुट हैं। उनके चेहरे की झुर्रियां समय की मार नहीं, बल्कि जीवन-यात्रा के मानचित्र हैं।

भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों को सदैव सम्मान का स्थान प्राप्त रहा है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है-“अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः। चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥” अर्थात जो व्यक्ति बड़ों का सम्मान करता है और उनकी सेवा करता है, उसकी आयु, विद्या, यश और बल में वृद्धि होती है। इस दृष्टि से वृद्धजनों का सम्मान केवल सामाजिक कर्तव्य नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्य भी है।

“विश्व वरिष्ठ नागरिक दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस” विश्व समुदाय को यह स्मरण कराता है कि वृद्धावस्था किसी व्यक्ति की उपयोगिता का अंत नहीं, बल्कि उसके जीवनानुभव की पराकाष्ठा है। इसलिए वृद्धजनों को सम्मान, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराना प्रत्येक सभ्य समाज का कर्तव्य है।

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