नई दिल्ली।
भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते का स्वागत करते हुए ईसीसीआई के अध्यक्ष सीए शंकर अंदानी ने कहा, भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता साझा समृद्धि का एक पुल है। यह स्वास्थ्य सेवा, एफएमसीजी और स्टार्ट अप जैसे क्षेत्रों में एक नई गति लाएगा। प्रधानमंत्री मोदी की अगुआई में यह समझौता मील का पत्थर साबित होगा। इस समझौते से वैश्विक आर्थिक शक्ति और प्रगति में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
शंकर अंदानी ने कहा कि भारत-यूके एफटीए अनिश्चितताओं से जूझ रहे मौजूदा वैश्विक व्यापार माहौल के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए बेहद फायदेमंद होगा जो यूके के बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहते हैं।
शंकर अंदानी ने कहा, भारत-यूके एफटीए का भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाता है। व्यापार सौदा संतुलित और दूरदर्शी है जो दोनों पक्षों को परस्पर लाभ पहुंचाएगा। यह जानकर खुशी हुई कि भारतीय उत्पादों के लिए अधिक बाजार पहुंच, बढ़ी हुई गतिशीलता और सामाजिक सुरक्षा कोष में दोहरे योगदान से बचने के लिए सामाजिक सुरक्षा समझौते के संदर्भ में उद्योग की प्रमुख मांगों पर भारत-यूके एफटीए में विचार किया गया है। ईसीसीआई प्रेसिडेंट ने कहा कि भारतीय उद्योग भारत-यूके एफटीए द्वारा प्रस्तुत अवसरों का लाभ उठाएगा और आगे चलकर निर्यात को बढ़ावा देगा।
गौरतलब है कि यूके भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है और व्यापार समझौते के साथ, आने वाले वर्षों में इसके कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।





