नई दिल्ली।
जून 2025 में सिक्किम के नाथू-ला दर्रे (भारत-चीन सीमा) के रास्ते पर फिर से शुरू हो जाएगी कैलाश मानसरोवर यात्रा। करोना काल 2020 से ये यात्रा बंद की हुई थी। हिन्दू, बौद्ध, जैन और बॉन धर्म के अनुयायियों के लिए कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यह यात्रा विशेष महत्व रखती है।
यात्रा का संचालन विदेश मंत्रालय द्वारा किया जाएगा और यह जून से सितंबर तक चलेगी। इस यात्रा के लिए दो सरकारी मार्ग हैं जिनमें पहला उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा है और दूसरा सिक्किम का नाथू-ला दर्रा। इस साल नाथू-ला के रास्ते से 50 यात्रियों के 10 बैच यात्रा पर रवाना होंगे। प्रत्येक समूह की यात्रा अवधि 21 दिन होगी और प्रति यात्री अनुमानित खर्च ₹2.83 लाख होगा। इस यात्रा पर सरकार द्वारा कोई सब्सिडी नहीं है। सनद रहे कि हज यात्रा पर 1 लाख रुपए की सब्सिडी उपलब्ध है।
पहला जत्था 15 जून को दिल्ली से रवाना होगा और 20 जून को तिब्बत पहुंचेगा, जबकि अंतिम बैच 7 अगस्त को यात्रा के लिए निकलेगा। यात्रियों के पास वैध भारतीय पासपोर्ट होना इस पूरी यात्रा के दौरान जरूरी है।
इस यात्रा के लिए सिक्किम पर्यटन विकास निगम यानी STDC को जिम्मेदारी दी गई है। सिक्किम सरकार नाथू-ला मार्ग पर बुनियादी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। राजधानी गंगटोक से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित इस मार्ग पर विश्राम गृह, शौचालय और दो अनुकूलन केंद्र बनाए जा रहे हैं ताकि तीर्थयात्रियों को ऊंचाई पर होने वाली समस्याओं से राहत मिल सके।







