नई दिल्ली।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान मसले पर यूरोपीय देशों का मुंह बंद कर दिया। उन्होंने यूरोपीय देशों को यूक्रेन और भारत की चिंताओं पर स्पष्ट जवाब दिया। पाकिस्तान के साथ जंग को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया और कहा गया कि क्या आप इंटरनेशनल लॉ को नहीं मानते? इस पर दो टूक जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा, ‘जब आप संघर्ष के बारे में सोचते हैं, तो आपको यूक्रेन की याद आती है, लेकिन जब मैं संघर्ष के बारे में सोचता हूं, तो मुझे पाकिस्तान, आतंकवाद, चीन और हमारे बॉर्डर याद आते हैं। इसलिए हमारा नजरिया एक जैसा तो बिल्कुल नहीं हो सकता।’ जर्मन अखबार फ्रैंकफर्टर ऑलगेमाइने जितुंग के साथ इंटरव्यू में विदेश मंत्री यूरोप-अमेरिका और भारत की विदेश नीति से जुड़े हर सवाल का जवाब दिया।
जब उनसे पूछा गया कि भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध का खतरा कितना था? तो उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवादियों के खिलाफ सटीक और सीमित कार्रवाई की थी, किसी देश के खिलाफ नहीं, जो किसी भी तरह से परमाणु युद्ध की ओर नहीं ले जाती।
एस जयशंकर से पूछा गया कि क्या संघर्ष के बाद स्थिति सामान्य हो गई है? तो उन्होंने इसका भी सटीक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने उद्देश्यों को पूरा किया और आतंकवादियों को स्पष्ट संदेश दिया कि हमलों की कीमत तो चुकानी ही पड़ेगी। पाकिस्तानी सेना की ओर से गोलीबारी के बाद भारत ने आत्मरक्षा में जवाब दिया और जब पाकिस्तान ने समझा कि उनका रास्ता नुकसानदेह है, तो फायरिंग रोक दी गई। यह स्थिति दो सप्ताह से स्थिर बनी हुई है।
जर्मनी ने भारत की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का समर्थन किया है। अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को यह स्पष्ट है कि आतंकवाद का जवाब देना जरूरी है। जयशंकर ने कहा कि जर्मनी की समझ बढ़ रही है और यह सही दिशा में बढ़ रहा है।








