इजराइल और ईरान के युद्ध से विदेश व्यापार पर भी असर होगा। भारत इजरायल को मुख्य रूप से रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और केमिकल्स के अलावा इंजीनियरिंग गुड्स और मशीनरी, जेम्स एंड जूलरी और टेक्सटाइल्स का निर्यात करता है। ईरान सहित पश्चिम एशिया को दवाओं, कपड़ों और मीट का निर्यात भी होता है। डॉ सहाय ने कहा, ‘इजरायल को भारत के पॉलिश्ड डायमंड एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है। रिटेल नेटवर्क्स में बाधा पड़ने से टेक्सटाइल्स ऑर्डर में देर होने या कैंसलेशन बढ़ने का खतरा है। वहीं, चावल और मीट का ईरान को होने वाला एक्सपोर्ट शिपमेंट में देरी के लिहाज से बहुत संवेदनशील है।‘ डॉ सहाय ने कहा, ‘वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने और क्रूड ऑयल के दाम चढ़ने से एक्सपोर्ट के लिए डिमांड घट सकती है। पश्चिम एशिया को माल भेजने वाले निर्यातकों को पेमेंट में देर और कॉन्ट्रैक्ट टलने का सामना करना पड़ सकता है।’
इजराइल द्वारा ईरान पर हमले से बने हालात में क्रूड ऑयल के करीब 10% उछलने के साथ रुपये पर दबाव बढ़ने और महंगाई बढ़ने का रिस्क बन गया है। वहीं, निर्यात पर भी असर पड़ेगा।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) के डीजी डॉ अजय सहाय ने कहा, ‘इस टकराव से स्वेज नहर और रेड सी सहित महत्वपूर्ण शिपिंग लाइंस के लिए रिस्क बन गया है। ये यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के साथ भारत के व्यापार के लिए अहम हैं। इस रूट में बाधा पड़ने से शिपमेंट्स में देर होगी और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ेगी।’
एमके ग्लोबल फाइनैंशल सर्विसेज की चीफ इकनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा, ‘ईरान होरमुज स्ट्रेट बंद करने की चेतावनी पहले भी दे चुका है। अगर ऐसा हुआ तो सऊदी अरब, कुवैत, इराक और यूएई की तेल सप्लाई पर असर पड़ेगा और कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है।‘ अगर लड़ाई बढ़ी तो कीमतें और चढ़ सकती हैं। दाम पहले ही 10% उछल चुके हैं। लड़ाई बढ़ने पर और 8-9% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।’






