
–युवाओं के मार्गदर्शक और सामाजिक बदलाव के शिल्पकार के रूप में चार दशक से सक्रिय हैं शुभ्रो रॉय
मीडिया वार्ता के दौरान यूथ मैनेजमेंट विश्लेषक डॉ नयन प्रकाश गांधी बताते है कि दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर और भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता में डिप्लोमाधारी शुभ्रो रॉय एक ऐसे असाधारण व्यक्ति हैं जिन्होंने अपना जीवन समाज सेवा और युवा सशक्तिकरण के लिए समर्पित कर दिया है। एक नेशनल सर्विस स्कीम (NSS) स्वयंसेवक के रूप में अपनी यात्रा शुरू करने वाले शुभ्रो रॉय आज एक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता और ‘यूथ मेंटर’ के रूप में जाने जाते हैं।
उनके सामाजिक कार्य का सफ़र ओडिशा के भुवनेश्वर में ‘सेंटर फॉर यूथ एंड सोशल डेवलपमेंट (CYSD)’ के संस्थापक कर्मचारी के रूप में शुरू हुआ। लगभग दो दशकों तक, उन्होंने CYSD में विभिन्न भूमिकाओं में काम करते हुए वंचित वर्ग, विशेषकर शहरी और ग्रामीण युवाओं के उत्थान के लिए अथक प्रयास किए। उन्होंने CYSD के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया, जिससे हज़ारों जिंदगियों में सकारात्मक बदलाव आया।
बाद में, शुभ्रो रॉय दिल्ली चले गए, जहाँ उन्होंने ‘नेशनल सोशल वॉच’ और ‘वादा ना तोड़ो अभियान’ जैसे महत्वपूर्ण थिंक टैंकों की स्थापना की और उनका संचालन किया। इन पहलों के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक जवाबदेही और अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई।
आगे गांधी ने बताया कि वर्तमान में, शुभ्रो रॉय कई नए स्टार्टअप्स और संगठनों को मेंटर कर रहे हैं, जिनमें जिस्ट्रीट, शेड्स ऑफ हैप्पीनेस, इंडियन
रिसर्च एकेडमी ,बिल्ड इंडिया ग्रुप , ओडिशा डेवलपमेंट फोरम, सेंटर फॉर लेवर स्ट्डीज, सेंटर फॉर सोशल चेंज, भारत लीडरशिप फेस्टिवल, सेव चाइल्ड बेगर, इंटीग्रेटेड वालंटियर, नेटवर्क, दिया, दिव्य युवा मंच, ख्वाब फाउंडेशन बिहार,
ऑस्कर, प्रोजेक्ट प्वाइंट ओडिशा एवं प्रोजेक्ट 100 जैसे अनेकों संस्थाओं के नाम सम्मिलित हैं।
यह उनकी व्यापक पहुँच और युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।इसके अतिरिक्त, वे “द सिविल सोसाइटी”, “इंटरफेथ फाउंडेशन ऑफ इंडिया” और “ग्लोबल यूथ पीस कमेटी (GYPC)” जैसे संगठनों के बोर्ड में भी हैं, और इंटरनेशनल यूथ कमेटी (IYC) तथा भारत लीडरशिप फेस्टिवल (BLF) के सलाहकार भी हैं।
शुभ्रो रॉय एक कुशल कम्युनिकेटर, नेटवर्कर और क्राइसिस मैनेजर हैं, जिनके पास मजबूत इंटरपर्सनल स्किल्स हैं। वे ‘दान उत्सव – द जॉय ऑफ गिविंग वीक’ का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
शुभ्रो रॉय की कहानी एक ऐसी प्रेरणा है जो यह सिखाती है कि शिक्षा और दृढ़ संकल्प के साथ, एक व्यक्ति कैसे समाज में बड़े पैमाने पर बदलाव ला सकता है। उनका जीवन वंचितों की सेवा और युवाओं को सही मार्ग दिखाने के लिए एक ‘प्रकाश स्तंभ’ के समान है, जो अनगिनत लोगों को बेहतर भविष्य की ओर प्रेरित कर रहा है।
गांधी बताते है शुभ्रो रॉय कि गरिमामई उपस्थिति में उन्हें पूर्व में कलाम यूथ एक्सीलेंस अवार्ड मिल चुका है, कई दशकों से अभी तक असंख्य युवाओं के प्रेरणा स्रोत हर दिल अजीज शुभ्रो रॉय युवाओं के लिए समर्पित है, यह हर युवा की जिम्मेदारी है कि ऐसे प्रेरणास्रोत मेंटर, युवा मार्गदर्शक की सोशल स्टोरी को अपने स्तर पर इसे आगे बढ़ाए, क्योंकि इस सोशल डिजिटल वेब मीडिया के जमाने में सामाजिक कार्यों को स्वयं की लेखनी से, अच्छे विचारों, इंस्पायरिंग स्टोरीज को आगे बढ़ाना भी सामाजिक सेवा का एक महत्वपूर्ण अंग है।







