फिरोज़ाबाद
इस्लाम के आखरी नबी (अल्लाह के दूत) हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (स०अ० व०) के 1500 वें जन्मदिवस पर साहित्यिक व सामाजिक संस्था बज़्मे फ़रोगे़ अदब फीरोजाबाद के सौजन्य से एस एम इलैक्ट्रोनिक्स 60 फुटा रोड पर 13 रबिउल अव्वल को नातिया मुशायरा (नबी की शान में पढ़ी जाने वाली कविता) का आयोजन किया गया जिस में शहर के मशहूर शायर और साहित्यिकारौं ने अपनी रचनायें सुना कर हज़रत मोहम्मद (स०अ०व०)का पैग़ाम लौगौं तक पहुंचाया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हाजी तालिब साहब थे।
कार्यक्रम का आरम्भ हाफ़िज़ आदिल साहब ने कलामे पाक की तिलावत से किया उस के बाद शायर वाहिद वारसी ने नाते रसूले पाक पढ़ते हुए कहा –
“वक़ारे खुदा से मोहम्मद हैं वाकिफ
खुदा जानता है वक़ारे मोहम्मद”
पैकर फिरोजाबाद ने यूं
“ख़ुश्बुयें सिमट के आ गईं नूर की रिदायें ओढ़ कर
जब क़लम ने मेरे लिख दिया आमना के लाल आ गये”
कलीम नूरी ने अपनी शायरी से यह पैगाम दिया
” इश्क़-ए-नबी में डूब के देखो तुमको पता चल जाएगा
जन्नत में ले जाने वाला रस्ता मेरे नबी का है ”
चाहत कामिल फीरोजाबादी ने कहा-
“मेरे हुज़ूर के दर की कुछ तो अज़मत है
जहां पे आकर फरिश्ते सलाम करते हैं”
मंज़र नवाब ने कहा ,
“अंधेरौं के परस्तारों को बतला दीजिए मंजर
अधिरों से नहीं डरते हैं दीवाने मोहम्मद के ”
बज़्मे फरोग़े अदब के अध्यक्ष असलम अदीब ने नबी की आमद पर यूं कहा—–
“ये नूरी बादल जो छा रहे हैं ज़मी पै मौसम बहार का है
हुज़ूर तशरीफ़ ला रहे हैं ज़मी पे मौसम बहार का है ”
हाफ़िज़ आदिल साहब ने अर्ज़ किया
जिस नबी के हाथों में क़िस्मते खुदाई है
में यक़ी से कहता हूँ ज़ाते मुस्तफाई है
डा०हाफिज़ नौमान वारसी साहब ने यूं कहा –
“हल सारे मसाहिल के हैं क़ुरआन के अन्दर
जुज़दान में रखने को ये क़ुरआन नहीं है”
उस्ताद शायर जनाब ज़ीरो साहब ने फ़रमाया —
” मेरे आक़ा के ग़ुलामौं के ग़ुलामौं के गुलाम
बादशाहों को भी ख़ैरात दिया करते हैं”
सीनियर शायर हाजी ऐजाज सिद्दीकी ने यूं मैसेज दिया
“जिब्राइल कहते हैं ईद है फरिश्तों की
हमने चांद देखा है आमना के आंगन में”
6 साल के नन्हे शायर रोहान रज़ा ने नाते पाक का मतला पढ़ कर खूब वाहवाही लूटी —
“लबों पे नाते नबी है जब से मेरा ये दिल भी महक रहा है
मिली तुम्हारी ग़ुलामी मुझको मिरा मुक़द्दर चमक रहा है”
फिरोज फरीदी, इलियास खान,नसीम और अन्य शायरौं ने भी मोहम्मद साहब की शान में नाते पाक पढ़ी।
मुशायरा का संचालन उस्ताद शायर जनाब ज़ीरो वाँदवी साहब ने किया।अन्त में स़ंस्था के अध्यक्ष असलम अदीब फीरोज़बादी ने कहा कि मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तमाम आलम में ये पैग़ाम पहुंचाया है कि बुराई से हमेशा दूर रहो । एक दूसरे की मदद करो, अच्छे अखलाक से पेश आओ , अपने पड़ोसी का ख्याल रखो, एक दूसरे की खतायें माफ करते रहा करो। अल्लाह ने कुरान के ज़रिए जो संदेश दिया है उस पर अमल करो। दूसरे धर्म की बुराई मत करो ।पांच वक्त की नमाज सादगी के साथ अदा करो। अपने भाई का हक मत मारो, सच्चे अमानत दार बनो। अल्लाह और उसके नबी को शोर-शराबा, दिखावा कतई पसंद नहीं। अतः आज हमें नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बताए हुए रास्ते पर अमल करने की ज़रूरत है।
मुख्य अतिथि हाजी तालिब साहब ने Financial में उपस्थित सभी व्यक्तियों का शुक्रिया अदा किया।
कार्यक्रम में ज़ाहिद भाई ,शाहिद,सईद,जावेद,इमरान, आमिर
नसीम,रफीक़ भाई,शमीम,शफीक़ आदि की उपस्थिति सराहनीय रही ।





