
– जिकड़ी भजनों की तान पर भोर तक जमे रहे श्रोता
फरह।
पं० दीनदयाल उपाध्याय स्मृति महोत्सव मेला में शनिवार रात्रि 10 बजे से शुरू हुई जिकड़ी भजन प्रतियोगिता रविवार को प्रातः 8:30 तक चली। समापन गायको को पुरस्कार वितरण के साथ हुआ।
मुख्य पंडाल में हुए जिकड़ी भजन का शुभारंभ अतिथियों द्वारा पं० दीनदयाल उपाध्याय के चित्रपट के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया। अलवर के ईसरोती से आए गायक तेज सिंह ने मदन सेन और उनकी पत्नी चंद्रप्रभा से जुड़े भजन प्रस्तुत किए, जबकि लोहकरेरा आगरा से आए मोती राम ने पांडवों का वनवास सुनाया। चिरमोली आगरा के गायक धर्मेंद्र ने द्रोणाचार्य पुत्र अश्वत्थामा के वध की कथा को ढोलक और हारमोनियम के साथ प्रस्तुत किया तो श्रोता झूम उठे।

पुरा मालोनी के गायक प्रहलाद सिंह ने द्रौपदी स्वयंवर प्रस्तुत किया, जबकि नगला संजा से आई सुनीता छोकर ने द्रोपदी का गंगा घाट पर राजा दंग से मिलन सामने रखा। गोंडा अलीगढ़ से आए चंद्रवीर ने मदन सेन और चंद्रप्रभा पर भजन प्रस्तुत किया, जबकि ओम प्रकाश पाराशर ने घटोत्कच का युद्ध सुनाकर श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। फोंडर से आई हेमा कुमारी ने जयद्रथ द्वारा द्रोपती का हरण भजन के रूप में प्रस्तुत किया।
सूरज की पौ फटने तक चली जिकड़ी भजन में प्रथम पुरस्कार तेज सिंह, धर्मेंद्र और प्रहलाद सिंह को संयुक्त रूप से दिया गया। द्वितीय पुरस्कार चंद्रवीर सिंह, ओम प्रकाश पाराशर और तृतीय पुरस्कार हरीशंकर कपिल गांजौली को मिला। बालिका वर्ग में प्रथम पुरस्कार सुनीता को द्वितीय पुरस्कार हेमा को और तृतीय पुरस्कार अमौरी राजस्थान से आई नीलम शर्मा को दिया गया। तीन प्रतिभागियों को भी सांत्वना पुरस्कार दिए गए।
संचालन मान सिंह राना ने किया। निर्णायक तेजवीर सोलंकी, व्यायाम शिक्षक संजीव कुमार आजाद, संजीव कुमार धर्मपुरा, ललित रावत, हेमराज सिंह रहे। कार्यक्रम में निदेशक सोनपाल, नरेंद्र पाठक, महिपाल सिंह, , भीकमचंद दुबे, जगमोहन पाठक, देवेंद्र सिंह, मुकेश शर्मा, मनीष वर्मा, अशोक शर्मा, राकेश सिंह, विजय सिंह, बच्चू सिंह, प्रमोद कुमार, चंद्रहंस आदि मौजूद रहे।





