
नई दिल्ली।
अनुसंधान, प्रयोगशाला परीक्षण, फील्ड ट्रायल और बाजार में उत्पादों की तैनाती को एक मंच पर लाने के लिए भारत और ब्रिटेन ने “इंडिया-यूके कनेक्टिविटी एंड इनोवेशन सेंटर” लॉन्च किया है। इससे दोनों देशों की नवाचार क्षमता को एकजुट कर उन्नत दूरसंचार तकनीकों में नए व्यावसायिक अवसर पैदा होंगे।
अगले चार वर्षों को 6जी तकनीक के विकास के लिए निर्णायक समय माना जा रहा है, और इस दौरान यह सेंटर तीन प्रमुख क्षेत्रों में काम करेगा-पहला, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग से टेलीकॉम नेटवर्क को और अधिक कुशल बनाना तथा नई सेवाओं को शुरू करना; दूसरा, नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (NTN) यानी सैटेलाइट और एयरबोर्न सिस्टम के माध्यम से ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में तेज इंटरनेट पहुंचाना; और तीसरा, दूरसंचार साइबर सुरक्षा को मजबूत करना ताकि नेटवर्क अधिक लचीला और भरोसेमंद बन सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री के बीच अपनाई गई ‘इंडिया-यूके विजन 2035’ की साझा महत्वाकांक्षी योजना के तहत दोनों देशों के बीच अनुसंधान और नवाचार सहयोग को और सशक्त बनाया जाएगा। इन्हें एक साझा प्लेटफॉर्म पर विकसित करने से न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक सुरक्षा लाभ भी प्राप्त होंगे।







