अब भारत सबसे उन्नत 2 नैनोमीटर चिप का जल्द ही करेगा निर्माण, अभी तक ताइवान में बनती हैं दुनिया की 60% सेमीकंडक्टर और करीब 90 प्रतिशत सबसे उन्नत चिप

नई दिल्ली।

ताइवान में दुनिया के 60% सेमीकंडक्टर और करीब 90 प्रतिशत सबसे उन्नत चिप का उत्पादन होता है। अब भारत सबसे उन्नत 2 नैनोमीटर चिप तकनीक पर काम कर रहा है और दुनिया में सेमीकंडक्टर चिप और सबसे उन्नत किस्म के 2 नैनोमीटर चिप उत्पादन के क्षेत्र में अपनी धाक जमाने की तैयारी कर रहा है।

प्रत्येक चिप में करोड़ों अरबों माइक्रो-स्केल स्विच होते हैं जिन्हें ट्रांजिस्टर कहा जाता है, जो विद्युत संकेतों को नियंत्रित करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे मस्तिष्क कोशिकाएं संदेश भेजती हैं। पतले चिप का मतलब है कम जगह में अधिक प्रोसेसिंग क्षमता। छोटे ट्रांजिस्टर अधिक दक्षता और कम बिजली की खपत को सक्षम बनाते हैं। वे राष्ट्रीय सुरक्षा, अंतरिक्ष खोज और रक्षा अनुप्रयोगों के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं। भारत में पहली बार 2 एनएम का चिप डिजाइन किया जा रहा है; हम 7, 5, और 3 से अब 2 एनएम की ओर बढ़ रहे हैं। यह प्रौद्योगिकी एआई, मोबाइल कंप्यूटिंग और उच्च निष्पादन प्रणालियों में अगली पीढ़ी के उपकरणों की सहायता करेगी।

सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत अब छह राज्यों में स्वीकृत परियोजनाओं की कुल संख्या दस हो गई है, जिनका कुल निवेश 1.6 लाख करोड़ रुपए है। भारत ने पहले 7 एनएम और 5 एनएम डिजाइन बनाने में सफलता हासिल की थी और अब 3 एनएम तक पहुंचना नवाचार में एक नई सीमा को चिह्नित करता है। भारत अब 2 एनएम चिप प्रौद्योगिकी की ओर बढ़ रहा है।

सेमीकंडक्टर के वैश्विक उद्योग में ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान, चीन और अमेरिका का प्रभुत्व है। ताइवान दुनिया के 60 प्रतिशत सेमीकंडक्टर और लगभग 90 प्रतिशत सबसे उन्नत चिप्स का उत्पादन करता है। भारत वैश्विक विनिर्माण में विविधता लाने में एक भरोसेमंद और विश्वसनीय भागीदार के रूप में उभर रहा है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में पिछले ग्यारह वर्षों में छह गुना वृद्धि हुई है, जिससे सेमीकंडक्टर की मांग में तेजी आई है।

भारत में अब दुनिया के लिए चिप डिजाइन करने और बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। भविष्य में देश में बनने वाले 2 एनएम के चिप एक ऐसी उपलब्धि होगी जो तकनीकी आत्मनिर्भरता में एक निर्णायक कदम का प्रतिनिधित्व करेगी। भारत सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए 76,000 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ ‘सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम’ को मंजूरी दी है।

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