पीएम जल जीवन मिशन के तहत अब तक 192 जिलों, 1,912 ब्लॉकों, 1,25,185 ग्राम पंचायतों और 2,66,273 गांवों में हर घर नल से जल पहुंचाया गया 

नई दिल्ली।

पीएम जल जीवन मिशन के तहत अब तक 192 जिलों, 1,912 ब्लॉकों, 1,25,185 ग्राम पंचायतों और 2,66,273 गांवों में हर घर नल से जल पहुंचाया जा चुका है। यह मिशन 15 अगस्त 2019 से शुरू की गई थी। उस समय केवल   3.23 करोड़ ग्रामीण घरों को नल से जल मिल रहा था। लेकिन अब 22 अक्टूबर तक इस मिशन के तहत 15.72 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से जल की सुविधा मिल चुकी है, जो ग्रामीण भारत के 81 प्रतिशत से अधिक घरों को कवर करता है।

गोवा, हरियाणा, गुजरात और अरुणाचल प्रदेश सहित 11 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 100 प्रतिशत नल जल कवरेज प्राप्त कर चुके हैं। इसके अलावा देशभर के 9,23,297 स्कूलों और 9,66,876 आंगनवाड़ी केंद्रों में भी अब नल से जल उपलब्ध है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इस मिशन से रोज लगभग 5.5 करोड़ घंटे की बचत होती है, जिसमें से 75 प्रतिशत समय महिलाओं का है। WHO का अनुमान है कि यदि हर व्यक्ति को सुरक्षित पेयजल मिले, तो हर साल करीब 4 लाख दस्त से होने वाली मौतें रोकी जा सकती हैं और 14 मिलियन “डिसेबिलिटी एडजस्टेड लाइफ इयर्स (DALYs)” बचाए जा सकते हैं। इससे स्वास्थ्य व्यय में लगभग 8.2 लाख करोड़ रुपए की बचत संभव है।

नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. माइकल क्रेमर के शोध के मुताबिक, सुरक्षित जल उपलब्धता से पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में लगभग 30 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।

महाराष्ट्र के मपान गांव में महिलाओं के स्वयं सहायता समूह ने नल जल योजना का संचालन संभालकर 100 प्रतिशत बिल वसूली सुनिश्चित की और 1.70 लाख रुपए की आय अर्जित की है। नगालैंड के वोक्हा में स्थानीय समुदायों ने जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए रिचार्ज पिट और पौधारोपण किया। असम के बोरबोरी गांव में नल जल और स्वच्छता अभियान के चलते 2022-23 में 27 जलजनित बीमारियों के मामलों से घटकर अब शून्य मामले रह गए हैं। राजस्थान के बोथरा गांव में चेक डैम और ट्रेंच निर्माण से जल स्तर में 70 फीट की वृद्धि हुई।

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