
नई दिल्ली।
पूरे देश में दाताओं के लिए एक समान मानदंड निर्धारित करना होगा। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने इंडियन सोसायटी ऑफ ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर ये निर्देश पारित किए। बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि वो अंग प्रत्यारोपण के लिए मॉडल एलोकेशन क्राइटेरिया को शामिल करते हुए एक राष्ट्रीय नीति तैयार करे। इस नीति का उद्देश्य राज्यों के बीच मौजूद अंतर को समाप्त करना और पूरे देश में दाताओं के लिए एक समान मानदंड निर्धारित करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (19 नवंबर) को केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वो राज्यों के साथ विचार-विमर्श कर अंग-प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) के लिए एक राष्ट्रीय नीति और पूरे देश में एक समान नियम जल्द से जल्द तैयार करे।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि नई नीति में अंगों के आवंटन और प्राप्ति में मौजूद जेंडर और जाति आधारित असमानताओं को विशेष रूप से दूर करने के उपाय शामिल हों। कोर्ट ने पाया कि कई राज्यों ने अब तक केंद्र द्वारा बनाए गए संशोधनों और नियमों को लागू नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात का संज्ञान लिया कि मणिपुर, नागालैंड, अंडमान निकोबार और लक्षद्वीप जैसे राज्यों में राज्य अंग एवं ऊतक प्रतिरोपण संगठन (SOTO) का अभाव है। कोर्ट ने केंद्र से राज्यों से परामर्श के बाद राष्ट्रीय अंग प्रतिरोपण कार्यक्रम के तहत इन निकायों का गठन करने को कहा।
जीवित रहते हुए अंगदान करने वालों को शोषण से बचाने के मुद्दे पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि ऐसे लोगों के कल्याण के लिए दिशा निर्देश विकसित किए जाएं ताकि अंगदान के बाद उनकी देखभाल की जा सके और उनका उत्पीड़न रोका जा सके।







