नई दिल्ली।
अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली लगभग 50 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली शीर्ष 100 जेनेरिक दवाओं में से 83 प्रतिशत के एपीआई का कोई भी स्रोत अमेरिका में नहीं है। भारत की भूमिका भी इस आपूर्ति शृंखला में अहम है। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली लगभग 50 प्रतिशत जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं, लेकिन भारतीय कंपनियां भी अपने लगभग 80 प्रतिशत एपीआई के लिए चीन पर निर्भर हैं।
समिति की एक जांच रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका में दवाओं का घरेलू उत्पादन तेजी से घटा है। वर्ष 2024 में अमेरिका ने अपनी जरूरत की सिर्फ 37 प्रतिशत दवाएं खुद बनाईं, जबकि 2002 में यह आंकड़ा 83 प्रतिशत था। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में इस्तेमाल होने वाले 95 प्रतिशत आइबुप्रोफेन, 70 प्रतिशत पैरासिटामोल और 45 प्रतिशत से अधिक पेनिसिलिन चीन से आते हैं।
समिति की रिपोर्ट में कई सुझाव दिए गए हैं, जिनमें जरूरी दवाओं के लिए अमेरिकी निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता देने वाला फेडरल बायर मार्केट बनाना, दवा आपूर्ति शृंखला की मैपिंग, दवाओं के मूल देश की जानकारी अनिवार्य करना, व्यापारिक जांच जैसे सेक्शन 232 का इस्तेमाल, ‘मेड इन अमेरिका’ लेबल के दुरुपयोग को रोकना और अमेरिकी बायोटेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना शामिल है। ध्यान देने वाली बात है कि भारत और चीन आज भी वैश्विक जेनेरिक दवा उद्योग के बड़े केंद्र हैं और अमेरिका सहित दुनिया भर में सस्ती दवाओं की आपूर्ति करते हैं।







