शायर मिर्जा ग़ालिब के 228 में जन्मदिन के मौके पर अखिल भारतीय रंगरेज़ फाउण्डेशन द्वारा शानदार मुशायरा

फीरोजाबाद।

साहित्यिक/सामाजिक संस्था बज़्मे फ़रोगे अदब के तत्वाधान में हजी ऐजाज साहब के हाल मे विश्व विख्यात शायर मिर्जा ग़ालिब के 228 में जन्मदिन के मौके पर अखिल भारतीय रंगरेज़ फाउण्डेशन द्वारा शानदार मुशायरा आयोजित किया गया। उस्ताद शायर जीरो साहब ने मिर्ज़ा ग़ालिब का जीवन परिचय कराते हुए कहा कि मिर्जा ग़ालिब का जन्म 27 दिसंबर 1797 को आगरा में हुआ था और 15 फरवरी 1869 को दिल्ली में मृत्यु हुई।उनका नाम मिर्ज़ा असदुल्ला खान था और तखल्लुस ग़ालिब था।मिर्जा गालिब उर्दू और फारसी शायरी के लिए बहुत मक़बूल हुए उनकी ग़ज़लें, रुबाई और कसीदे लोगों ने बहुत पसंद किये। मिर्ज़ा ग़ालिब के खत (पत्र)भी बहुत पसंद किए गये ।उनके खत लिखने का अंदाज निराला था मिर्जा गालिब शायरी की दुनिया में अमर हो गये।

मुशायरे का आरंभ नाते पाक के बाद मिर्ज़ा ग़ालिब की ये मशहूर गजल पढ़ कर कलीम नूरी ने किया।

” हर ऐक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है

तुम्ही बताओ ये अंदाज़े गुफ्तगू क्या है”

हाजी ऐजाज ने यूं कहा

“ग़ालिब-ओ-मीर की करो तकलीद वादि-ए-इश्क में क़याम करो

जिससे है रोशनी ज़माने में उन बुज़ुर्गौं का एहतराम करो”

उमर पैकर फ़ीरोज़ाबादी

हर एक ज़ख़्म मेरे दिल का भर गया लेकिन

वो जख़्म भरता नहीं है जो भाई देता है

सीनियर शायर क़मर वारसी ने यूं कहा,

” सूने खंडर में दीप जलते तुम क्यों आए शाम ढले

बीती बातें याद दिलाने तुम क्यों आए शाम ढले

मीर की गजलें तुम तो हमसे अक्सर सुनते रहते

गालिब के अब शेर सुनाने तुम क्यों आए सामने”

उस्ताद शायर जीरो बादवी ने यूं व्यंग किया,

“पेट में दर्द सा उठा क्या है

आखिर इस दर्द की दवा क्या है

क़बर-ए-ग़ालिब में घुस गईं मैडम

या इलाही ये माजरा क्या है ”

करीम नूरी फीरोज़ाबादी ने ग़ालिब साहब के लिये

रुबाई यूं पढ़ी

“जिस लफ़्ज़ को चाहा वो चमकदार हुआ

मज़मून जो लिक्खा वही शहकार हुआ

दुनियां में बहुत आऐ हैं फ़नकार मगर

गा़लिब सा कहीं कोई न फ़नकार हुआ”

मंज़र नबाव ने यूं हंसने पर मजबूर कर दिया।

” भगाए जब गए ससुराल से अब्बा मियां बोले

बड़े बे आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकल ”

अमजद रजा फ़ीरोजाबादी ने शेर यूं पढ़ा

” रखी जब उनके आगे बात दिल की

समझ में आ गई औक़ात दिल की”

संस्था के अध्यक्ष असलम अदीब ने यूं सब को दाद देने पर मजबूर कर दिया उन्होंने कहा—

“लफ्जों से खेलने का सलीक़ा दिया उन्हें

रब ने सुखन-बरौं का क़बीला दिया उन्हें

मिर्ज़ा असद था नाम तो ग़ालिब था तख़ल्लुस

शेर-ओ-सुखन का खूब तरीक़ा दिया उन्हें ”

इसके अलावा अख़्तर दहलवी और हाफ़िज़ आदिल को भी खू़ब प़सद किया गया,

कार्यक्रम के अंत में मुशायरा की अध्यक्षता कर रहे हाजी असलम अदीब (अध्यक्ष बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब ) ने सभी शायरों और श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया। अखिल भारतीय रंगरेज फाउंडेशन और बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब के सदस्यों को मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की याद में आयोजित किए गए मुशायरे के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। मुशायरा खूब कामयाब रहा।संचालन विख्यात शायर उस्ताद ज़ीरो वाँदवी साहब ने किया

कार्यक्रम में शहर फीरोज़ाबाद के कई सम्माननीय व्यक्ति मौजूद रहे । पिंटू, ज़ाहिर,असलम खान ,मो०इश्त्याक, परवेज़,मोहम्मद उबैदुल्ला, संजय खान नफीस आलम, है दर अली,कामरान हुसैन वारसी,हनीफ निजामी,जफर भाई, राजू भाई, ज़ियाउल हक़ अंसारी ,अमजद खान, डॉक्टर अफसरआदि की उपस्थिति सराहनीय रही।

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