नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्मजयंती, नेताजी का पराक्रम, उनका शौर्य, 23 जनवरी की ये गौरवशाली तारीख हमें प्रेरणा देती है। साल 2026 में पराक्रम दिवस का मुख्य आयोजन अंडमान निकोबार में हो रहा है। शौर्य, पराक्रम और बलिदानों से ओतप्रोत अंडमान निकोबार का इतिहास, यहां की सेल्यूलर जेल में वीर सावरकर जैसे अनगिनत देशभक्तों की गाथाएं, नेताजी सुभाष चंद्र बोस से इसका संबंध, ये बातें पराक्रम दिवस के इस आयोजन को और भी खास बनाती हैं। साल 2026 में पराक्रम दिवस का मुख्य आयोजन अंडमान निकोबार में हो रहा है। शौर्य, पराक्रम और बलिदानों से ओतप्रोत अंडमान निकोबार का इतिहास, यहां की सेल्यूलर जेल में वीर सावरकर जैसे अनगिनत देशभक्तों की गाथाएं, नेताजी सुभाष चंद्र बोस से इसका संबंध, ये बातें पराक्रम दिवस के इस आयोजन को और भी खास बनाती हैं।
उन्होंने कहा कि अंडमान की धरती इस विश्वास का प्रतीक है कि स्वतंत्रता का विचार कभी भी समाप्त नहीं होता। यहां कितने ही क्रांतिकारियों को यातनाएं दी गईं, यहां कितने ही सेनानियों के प्राणों की आहुति हुई, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी बुझने की जगह और तेज होती चली गई। और उसका परिणाम ये हुआ कि अंडमान निकोबार की यही धरती आजाद भारत के प्रथम सूर्योदय की साक्षी बनी।
उन्होंने कहा कि हमने दिल्ली के लाल किले में नेताजी सुभाष को समर्पित म्यूजियम का निर्माण किया है। इंडिया गेट के समीप नेताजी की विशाल प्रतिमा लगाई गई है। गणतंत्र दिवस की परेड में हिन्द फौज के योगदान को भी देश ने याद किया है। हमने सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी शुरू किए हैं। ये विभिन्न कार्य केवल नेताजी सुभाष चंद्र बोस का सम्मान ही नहीं हैं। ये हमारी युवा पीढ़ी के लिए, और भविष्य के लिए भी अमर प्रेरणा के स्रोत हैं। अपने आदर्शों का ये सम्मान, उनसे प्रेरणा, यही विकसित भारत के हमारे संकल्प को ऊर्जा और आत्मविश्वास से भर रहा है।





