साहित्यिक/सामाजिक संस्था बज़्मे फ़रोगे अदब के तत्वाधान में इकरा कान्वेंट स्कूल में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के मौके पर ओसियन गार्डन में साहित्यिक मुशायरा आयोजित किया गया।
सर्व प्रथम स्कूल के डायरैक्टर मैराज अब्बास, मुख्य अतिथि डा० ज़फर आलम और असलम अदीब ने ध्वजारोहण किया और सब ने मिलकर राष्ट्रीय गान किया।
कार्यक्रम का आरम्भ मुख्य अतिथियों द्वारा महात्मा गांधी (बापू)जी,डा० भीमराव अम्बेडकर (बाबा साहब) जी, सुभाष चन्द्र बोस जी,सरदार बल्लभ भाई पटेल जी के चित्रों पर माल्यार्पण कर किया गया।स्कूल के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
तदोपरांत राष्ट्रीय ऐकता और भाई चारे को समर्पित साहित्यिक मुशायरा आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मैराज अब्बास ने की मुख्य अतिथि डा० ज़फर आलम और हाजी मुनीर रंगरेज साहब रहे। मुशायरे का संचालन विख्यात शायर उस्ताद ज़ीरो वाँदवी साहब ने किया। कलीम नूरी ने नात पढ़ कर मुशायरे आरम्भ किया।

शायर अमजद रज़ा ने 26 जनवरी की शान यूं बयां की….
“आंखों में इसकी एक चमक इक बहार है
छब्बीस जनवरी की फ़ज़ा खुश गवार है
ये भाई चारा यूं ही हमेशा बना रहे
अमजद यही खुदा से दुआ बार बार है”
मंजर नवाब मंजर साहब ने यूं बयां किया….
” बड़ों में बैठ के बातें फुज़ूल मत करना
किसी बुराई को दिल से क़ुबूल मत करना ”
पैकर फ़ीरोज़ाबादी ने यूं कहा…..
“लाई पैग़ाम- ए-ज़िंदगी लाई आई छब्बीस जनवरी आई
जगमगाया वतन का हर ज़र्रा पाई फूलों ने ताज़गीक पाई”
चाहत कामिल ने कलाम पढ़ा…..
“खून की इसको मेरे अगर जरूरत होगी
एक-एक क़तरा बहा दूंगा बदन से अपने
मर भी जायेगा तो छूटेगा ना दामन इसका
इस कदर प्यार है चाहत को वतन से अपने”
कलीम नूरी ने भाई चारे पर शायरी यूं पढ़ी…..
” आओ चरागे़ अम्न जलाऐं गली गली
जम्हूरियत का जश्न मनाऐं गली गली
दौलत मुहब्बतौं की लुटाऐं गली गली
सब को सबक़ ये मिल के पढ़ायें गली गली”
हाजी ऐजाज सिद्दीकी ने यूं कहा ……
“तेरे किरदार का सौदा नहीं होने देंगे
ऐ वतन तुझको कभी रुसवा नहीं होने देंगे”
हाजा मुनीर साहब ने य़ूं पैग़ाम दिया….
“नफरतों के चलन छोड़िये प्यार से टूटे दिल जोड़िये
फिर न भटके कोई राह में ऐसे नक्शे-कदम छोड़िये”
संस्था बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब अध्यक्ष असलम अदीब ने
य़ूं कहा….
” बुग़्ज़ो हसद अदावतें दिल से मिटाइये
मिलकर तराने हिंद की अज़मत के गाइये
योमे जम्हूरिया का है पैगा़म सब को ये
हर सू खु़लूसो प्यार की शम्में जलाइये”
उस्ताद शायर ज़ीरो साहब ने यह पढ़कर लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया…..
लूट कर सरकार को सरकार के चक्कर में हैं
झोपड़ी वाले कुतुब मीनार के चक्कर में हैं”
कवि आमद साढ़ूपुरी ने यूं कहा…..
“इश्क़े वतन से खुशी नसीब होती है
वतन पे मरकर जन्नत नसीब होती है”
मुशायरा देर तक चला अंत में अध्यक्षता कर रहे मेराज अब्बास साहब ने कहा कि इकरा कान्वेंट स्कूल में आज गणतंत्र दिवस के साथ-साथ मुशायरे का आयोजन किया गया है जहां शायरों ने एक से एक बेहतर देश-प्रेम और भाई-चारा पर बेहतरीन कलाम पेश किए हैं। मैं सभी शायरों का शुक्रिया अदा करता हूं और स्कूल स्टाफ का प्रिंसिपल साहब का और मैनेजमेंट सबका शुक्रिया अदा करता हूं ।सब ने मेहनत करके अच्छा कार्यक्रम आयोजित किया । खासकर असलम अदीब फीरोज़बादी साहब के सहयोग से हम सफल मुशायरा कराने में कामयाब रहे।
कार्यक्रम में क़ाज़ी अरशद साहब, सरबर साहब, साहिल खान, आसिफ अली, सिमरन मैम,सुमैय्या मैम,रुचि मैम,मानसी मैम,महाम मैम,आकांक्षा जी,अनमता मैम, शबनम मैम,मीना जी,अलशिफा जी,अंजुम मैम,मंताशा जी,शिफा मैम,शमा मैम और स्कूल प्रधानाचार्य श्री रवि कुशवाहा जी की उपस्थिति सराहनीय रही।
हाजी ऐजाज साहब के हाल मे विश्व विख्यात शायर मिर्जा ग़ालिब के 228 में जन्मदिन के मौके पर अखिल भारतीय रंगरेज़ फाउण्डेशन द्वारा शानदार मुशायरा आयोजित किया गया। उस्ताद शायर जीरो साहब ने मिर्ज़ा ग़ालिब का जीवन परिचय कराते हुए कहा कि मिर्जा ग़ालिब का जन्म 27 दिसंबर 1797 को आगरा में हुआ था और 15 फरवरी 1869 को दिल्ली में मृत्यु हुई।उनका नाम मिर्ज़ा असदुल्ला खान था और तखल्लुस ग़ालिब था।मिर्जा गालिब उर्दू और फारसी शायरी के लिए बहुत मक़बूल हुए उनकी ग़ज़लें, रुबाई और कसीदे लोगों ने बहुत पसंद किये। मिर्ज़ा ग़ालिब के खत (पत्र)भी बहुत पसंद किए गये ।उनके खत लिखने का अंदाज निराला था मिर्जा गालिब शायरी की दुनिया में अमर हो गये।
मुशायरे का आरंभ नाते पाक के बाद मिर्ज़ा ग़ालिब की ये मशहूर गजल पढ़ कर कलीम नूरी ने किया।
” हर ऐक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुम्ही बताओ ये अंदाज़े गुफ्तगू क्या है”
हाजी ऐजाज ने यूं कहा
“ग़ालिब-ओ-मीर की करो तकलीद वादि-ए-इश्क में क़याम करो
जिससे है रोशनी ज़माने में उन बुज़ुर्गौं का एहतराम करो”
उमर पैकर फ़ीरोज़ाबादी
हर एक ज़ख़्म मेरे दिल का भर गया लेकिन
वो जख़्म भरता नहीं है जो भाई देता है
सीनियर शायर क़मर वारसी ने यूं कहा,
” सूने खंडर में दीप जलते तुम क्यों आए शाम ढले
बीती बातें याद दिलाने तुम क्यों आए शाम ढले
मीर की गजलें तुम तो हमसे अक्सर सुनते रहते
गालिब के अब शेर सुनाने तुम क्यों आए सामने”
उस्ताद शायर जीरो बादवी ने यूं व्यंग किया,
“पेट में दर्द सा उठा क्या है
आखिर इस दर्द की दवा क्या है
क़बर-ए-ग़ालिब में घुस गईं मैडम
या इलाही ये माजरा क्या है ”
करीम नूरी फीरोज़ाबादी ने ग़ालिब साहब के लिये
रुबाई यूं पढ़ी
“जिस लफ़्ज़ को चाहा वो चमकदार हुआ
मज़मून जो लिक्खा वही शहकार हुआ
दुनियां में बहुत आऐ हैं फ़नकार मगर
गा़लिब सा कहीं कोई न फ़नकार हुआ”
मंज़र नबाव ने यूं हंसने पर मजबूर कर दिया।
” भगाए जब गए ससुराल से अब्बा मियां बोले
बड़े बे आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकल ”
अमजद रजा फ़ीरोजाबादी ने शेर यूं पढ़ा
” रखी जब उनके आगे बात दिल की
समझ में आ गई औक़ात दिल की”
संस्था के अध्यक्ष असलम अदीब ने यूं सब को दाद देने पर मजबूर कर दिया उन्होंने कहा—
“लफ्जों से खेलने का सलीक़ा दिया उन्हें
रब ने सुखन-बरौं का क़बीला दिया उन्हें
मिर्ज़ा असद था नाम तो ग़ालिब था तख़ल्लुस
शेर-ओ-सुखन का खूब तरीक़ा दिया उन्हें ”
इसके अलावा अख़्तर दहलवी और हाफ़िज़ आदिल को भी खू़ब प़सद किया गया,
कार्यक्रम के अंत में मुशायरा की अध्यक्षता कर रहे हाजी असलम अदीब (अध्यक्ष बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब ) ने सभी शायरों और श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया। अखिल भारतीय रंगरेज फाउंडेशन और बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब के सदस्यों को मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की याद में आयोजित किए गए मुशायरे के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। मुशायरा खूब कामयाब रहा।संचालन विख्यात शायर उस्ताद ज़ीरो वाँदवी साहब ने किया
कार्यक्रम में शहर फिरोज़ाबाद के कई सम्माननीय व्यक्ति मौजूद रहे । पिंटू, ज़ाहिर,असलम खान ,मो०इश्त्याक, परवेज़,मोहम्मद उबैदुल्ला, संजय खान नफीस आलम, है दर अली,कामरान हुसैन वारसी,हनीफ निजामी,जफर भाई, राजू भाई, ज़ियाउल हक़ अंसारी ,अमजद खान, डॉक्टर अफसरआदि की उपस्थिति सराहनीय रही।








