
नई दिल्ली।
भारत को दुनिया का ‘इलेक्ट्रॉनिक्स हब’ बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने 2026 के बजट में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए दी जाने वाली राशि को 23,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया है।
वर्तमान में Apple और Samsung जैसी कंपनियों के भारत में होने के बावजूद, पार्ट्स का केवल 15-20% हिस्सा ही भारत में बनता है। सरकार इस ‘वैल्यू एडिशन’ को बढ़ाकर 30-40% तक ले जाना चाहती है। सरकार ने उन पुर्जों की लिस्ट तैयार की है जिनके उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें मोबाइल फोन की स्क्रीन और कैमरे के पार्ट्स, सर्किट बोर्ड, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का मुख्य बोर्ड, लिथियम सेल और एनक्लोजर, बैटरी और उसके बाहरी कवर, पैसिव कंपोनेंट्स: रेजिस्टर, कैपेसिटर और फेराइट्स जैसे छोटे लेकिन जरूरी पार्ट्स आदि शामिल हैं।
यदि स्मार्टफोन, लैपटॉप, एसी और फ्रिज में लगने वाले कंपोनेंट्स भारत में ही सस्ते दाम पर बनेंगे, तो आने वाले समय में इन इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की कीमतों में गिरावट आएगी और उपभोक्ताओं को लाभ होगा।
सरकार का अनुमान है कि इस स्कीम से लगभग 51,000 लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा। देश का अपना उत्पादन बढ़ेगा साथ ही निर्यात भी बढेगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स के लिए चीन जैसे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।





