
अदानी ग्रुप और अबु धाबी की इन्वेस्टमेंट कंपनी एल्यूमीनियम सैक्टर में 11.5 बिलियन डॉलर का निवेश करके एक बड़ा एल्युमीनियम प्लांट बनाने की योजना बना रहे हैं। इससे भारत की कुल क्षमता में लगभग 50% की बढ़ोतरी हो सकती है। अडानी के इस प्लांट से हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और वेदांता एल्युमीनियम को कड़ी टक्कर मिल सकती है।
अडानी अपने बढ़ते इन्फ्रास्ट्रक्चर बिजनेस के लिए कमोडिटी सप्लाई सुरक्षित करना चाहते हैं। एल्युमीनियम सेक्टर में उतरने की योजना भी उसी रणनीति का हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक अडानी और IHC मिलकर ओडिशा में 2 मिलियन टन से ज्यादा सालाना क्षमता वाला एल्युमीनियम स्मेल्टर बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं।
यह फैसिलिटी एक इंटीग्रेटेड यूनिट होगी जिसमें स्मेल्टिंग और रिफाइनिंग दोनों शामिल होंगे। साथ ही एल्युमीनियम प्रोजेक्ट में एक कैप्टिव पावर प्लांट भी शामिल होगा। लॉजिस्टिक्स के लिए ओडिशा में बंगाल की खाड़ी में स्थित धामरा पोर्ट का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है। इस पोर्ट का मालिकाना हक अडानी ग्रुप के पास है।
भारत दुनिया में एल्युमीनियम का दूसरा बड़ा उत्पादक देश है। पिछले साल भारत का कुल उत्पादन 4.2 मिलियन टन रहा। इस दौरान देश में 5.5 मिलियन टन एल्युमीनियम की खपत हुई। भारत में प्रति व्यक्ति खपत 3.4-3.9 किलोग्राम है जबकि ग्लोबल एवरेज 8-12 किलोग्राम है। भारत दुनिया में एल्युमीनियम का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश में इसकी खपत 2030 तक बढ़कर 8.5 मिलियन टन, 2040 तक 18 मिलियन टन और 2047 तक 28 मिलियन टन होने की उम्मीद है। इन्हीं आंकड़ों पर फोकस करते हुए अदानी ग्रुप ने इस क्षेत्र में उतरने की अपनी योजना बनाई है।










