देश आज कृतज्ञता और सम्मान के साथ मना रहा है 27वां कारगिल विजय दिवस

नई दिल्ली।

देश आज कृतज्ञता और सम्मान के साथ 27वां कारगिल विजय दिवस मना रहा है। यह भारतीय सैनिकों की अदम्य वीरता, अद्वितीय साहस और अटूट संकल्प का प्रतीक है और राष्ट्रीय गौरव एवं प्रेरणा का एक स्थायी स्रोत बना हुआ है। यह अवसर 1999 में कारगिल युद्ध में भारत की ऐतिहासिक विजय की स्मृति को पुनर्जीवित करता है, जब भारतीय सैनिकों ने अद्वितीय शौर्य और अटूट दृढ़ता का परिचय देते हुए कारगिल की बर्फ से ढकी चोटियों को दुश्मन के कब्जे से मुक्त कराया था. 26 जुलाई 1999 को लद्दाख की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं पर तिरंगा एक बार फिर गर्व के साथ लहराया, जो वीरता, सर्वोच्च बलिदान और भारत की अदम्य राष्ट्रीय भावना का अमर प्रतीक बन गया।

कारगिल संघर्ष मई 1999 में शुरू हुआ, जब घुसपैठियों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर कारगिल क्षेत्र की महत्वपूर्ण ऊंची चोटियों पर स्थित भारतीय चौकियों पर अवैध कब्जा कर लिया। भारत ने इस चुनौती का सामना करते हुए ऑपरेशन विजय शुरू किया। इस अभियान में भारतीय सैनिकों ने शानदार सैन्य रणनीति, अटूट संकल्प और अदम्य साहस का परिचय दिया। दो महीने से अधिक समय तक चले भीषण संघर्ष के बाद सभी घुसपैठियों को खदेड़ दिया गया और दुश्मन के कब्जे वाली प्रत्येक चौकी पर एक बार फिर भारतीय तिरंगा लहराया गया।

यह घुसपैठ पाकिस्तान के ‘ऑपरेशन बद्र’ का हिस्सा थी। इस अभियान के तहत पाकिस्तानी सैनिकों ने कश्मीरी वेश में एलओसी पार कर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया और भारतीय चौकियों पर अवैध कब्जा कर लिया। उनका मकसद कश्मीर और लद्दाख के बीच संपर्क को बाधित करना, सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात भारतीय सैनिकों को अलग-थलग करना तथा भारत पर कश्मीर मुद्दे पर बातचीत का दबाव बनाना था।

स्थानीय निवासियों ने 3 मई 1999 को सबसे पहले कारगिल सेक्टर में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी। इसके बाद स्थिति की पुष्टि के लिए तत्काल टोही गश्ती दल भेजे गए. जमीनी गश्त और हवाई निगरानी के माध्यम से जल्द ही घुसपैठ के वास्तविक स्वरूप और उसके दायरे का पता चल गया। घुसपैठियों ने श्रीनगरलेह नेशनल हाईवे पर निगरानी रखने वाली महत्वपूर्ण ऊंची चोटियों पर अपनी मजबूत स्थिति बना ली थी। इनमें से अनेक चौकियां 5,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित थीं, जिससे सैन्य अभियान अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया।

भारत ने इस चुनौती का सामना संयम, दृढ़ संकल्प और अटूट साहस के साथ किया. सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि एलओसी को पार नहीं किया जाएगा। अभियान का मकसद साफ था, दुश्मन के कब्जे वाली प्रत्येक भारतीय चौकी को फिर अपने नियंत्रण में लेना। इसी टारगेट को हासिल के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया गया।

कठिन संघर्ष के बाद 13 जून 1999 को पॉइंट 4590 और टोलोलिंग पर एक बार फिर भारतीय नियंत्रण स्थापित कर लिया गया। द्रास सेक्टर की सबसे महत्वपूर्ण अहम चोटियों में शामिल टाइगर हिल भारतीय सेना के प्रमुख टारगेट में से एक थी। अद्वितीय साहस और कठिन परिस्थितियों में चलाए गए अभियान के बाद 4 जुलाई 1999 को भारतीय सैनिकों ने इस चोटी पर कब्जा कर लिया। पॉइंट 4875, बटालिक, मुश्कोह घाटी और कक्सर क्षेत्रों में भी भीषण संघर्ष हुए। भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए दुश्मन के कब्जे वाली प्रत्येक सामरिक चोटी को फिर अपने नियंत्रण में लेने के लिए कठिन परिस्थितियों में एक-एक मोर्चे पर निर्णायक लड़ाई लड़ी। तीन महीने तक चले सैन्य अभियानों के बाद भारत ने अपने सभी कब्जे वाले क्षेत्र और चौकियां फिर हासिल कर लीं।

SHARE