
गाजियाबाद में बुजुर्गों की टोली अगली पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण देने के लिए वृक्षारोपण कर रही है। ये लोग मिलजुल कर, मोहल्लों से, और अपने परिचितों से फण्ड की व्यवस्था करके इस कार्य को कर रहे हैं। ये लोग अब तक 25000 पेड़ लगा चुके हैं। इसके लिए इनकी खूब तारीफ हो रही है।
शहर में लगातार बढ़ते कंक्रीट के जंगल और घटती हरियाली के बीच शहर के कुछ बुजुर्गों और पर्यावरण प्रेमियों ने एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो समाज को पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक अर्थ समझा रही है। क्योकि अपने अपने घर सब बनाते हैं, बिल्डर फ्लैट्स, बिल्डिंग बनाते हैं, सड़क बनाते हैं, सरकार सड़क नाली बना देती है। लेकिन पेड़ लगाने में सभी लापरवाह हो जाते हैं। ये कोई नहीं सोचता कि जब इन गली मोहल्लों में, कालोनी में, बिल्डिंग में हजारों लोग रहेंगे तो उन्हें स्वच्छ वातावरण, साँस लेने के लिए भरपूर ऑक्सीजन और तापमान नियंत्रण के लिए पेड़ों की आवश्यकता होती है।
गाजियाबाद में बुजुर्गों की यह टोली पिछले करीब दो दशकों से बिना किसी प्रचार-प्रसार या सरकारी सहायता की अपेक्षा किए लगातार पौधारोपण और उनकी देखभाल में जुटी है। इनके प्रयासों से अब तक शहर के विभिन्न हिस्सों में 25 हजार से अधिक छायादार, फलदार और औषधीय पौधे लगाए जा चुके हैं। इनमें से हजारों पौधे आज विशाल वृक्ष बनकर लोगों को छाया, स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण दे रहे हैं।
इस मुहिम के तहत नीम, पीपल, पिलखन, सहजन, आम, इमली, बेल और अन्य देशी प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इनका चयन इस आधार पर किया जाता है कि वे लंबे समय तक जीवित रहें और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अधिक उपयोगी साबित हों।
टीम का सबसे बड़ा लक्ष्य पौधों को जीवित रखना है। इसी कारण टोली के सदस्य प्रतिदिन सुबह छह बजे से करीब साढ़े सात बजे तक ई-रिक्शा और छोटे वाहनों में पानी की टंकियां भरकर निकलते हैं और पौधों को पानी देते हैं। साथ ही यदि कोई पौधा सूख जाता है तो उसके स्थान पर नया पौधा लगाया जाता है।












