एनआईए की अदालत में विशेष न्यायाधीश अभय सिंह राजपूत ने झीरम घाटी हत्याकांड के 2 महिलाओं सहित 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई

एनआईए की अदालत में विशेष न्यायाधीश अभय सिंह राजपूत ने झीरम घाटी हत्याकांड के 2 महिलाओं सहित 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई

एनआईए की अदालत में विशेष न्यायाधीश अभय सिंह राजपूत ने इस मामले में आरोपियों को दोषी ठहराने वाला फैसला सुनाया था। बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी ने बताया कि न्यायाधीश ने 2 महिलाओं सहित 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। अरविंद चौधरी के मुताबिक, मुकदमे की सुनवाई के दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे।

यह हमला 25 मई 2013 को हुआ था, जब नक्सलियों ने बस्तर जिले के दरभा पुलिस स्टेशन की सीमा के भीतर स्थित झीराम घाटी में एक नेशनल हाइवे पर कांग्रेस की ‘परिवर्तन रैली’ पर घात लगाकर हमला किया था। यह वामपंथी उग्रवाद से जुड़े सबसे घातक हमलों में से एक था। इस हमले में कांग्रेस नेताओं, नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों सहित कुल 29 लोग मारे गए और 30 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इस हमले ने उस समय राज्य में पार्टी के टॉप नेताओं को लगभग पूरी तरह से खत्म कर दिया था।

इस हमले में मरने वालों में तत्कालीन राज्य कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश, विधानसभा में पूर्व विपक्ष के नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ला, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक उदय मुडलियार शामिल थे। इस हमले के दो दिन बाद एनआईए ने जांच अपने हाथ में ले ली थी और 25 सितंबर 2014 को NIA ने जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत में गिरफ्तार 9 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। फिर 28 सितंबर 2015 को एनआईए ने 30 अन्य आरोपियों के खिलाफ भी आरोपपत्र दायर किया और इस मामले में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि एक आरोपी की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई थी। ऐसे में कोर्ट ने पहले 10 आरोपियों को हमले का दोषी माना और फिर उन्हें सजा सुनाई।

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