
AI FutureReady Conclave 2026 में इंडिया एआई मिशन की रणनीति और भारत की एआई क्षमता पर दिया व्याख्यान
आगरा।
इंडिया एआई मिशन के निदेशक मोहम्मद वाई. सफिरुल्ला ने AI FutureReady Conclave 2026 में भारत सरकार के इंडिया एआई मिशन पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भारत अपनी विशाल युवा शक्ति, तकनीकी प्रतिभा और नवाचार क्षमता के बल पर वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। भारत सरकार का इंडिया एआई मिशन देश की जमीनी आवश्यकताओं के अनुरूप स्वदेशी, सुरक्षित, विश्वसनीय और समावेशी एआई इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य केवल वैश्विक स्तर पर विकसित एआई तकनीकों का इस्तेमाल करना नहीं है, बल्कि भारत की अपनी आवश्यकताओं, भाषाई विविधता और जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप स्वदेशी एआई तकनीक विकसित करना है। इसी दिशा में इंडिया एआई मिशन के तहत 20 स्वदेशी एवं संप्रभु एआई मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। इससे विदेशी एआई प्रणालियों पर निर्भरता कम करने और भारत की डिजिटल एवं तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि देश में एआई की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उच्च-स्तरीय नेशनल सुपरकंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। साथ ही, भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप अधिक सटीक और प्रभावी एआई मॉडल विकसित करने के लिए गैर-व्यक्तिगत एवं गुणवत्तापूर्ण भारतीय डेटासेट के उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए AI Kosh जैसे प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
सफिरुल्ला ने कहा कि एआई का लाभ केवल तकनीकी विशेषज्ञों या बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि आम भारतीय नागरिक तक उसकी अपनी भाषा में पहुंचे, इसके लिए भी व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। भारतीय भाषाओं में एआई की उपलब्धता डिजिटल समावेशन को नई गति दे सकती है।
उन्होंने कहा कि कृषि को डेटा-पावर्ड बनाने, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर एवं अधिक प्रभावी बनाने तथा विभिन्न क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। एआई के माध्यम से किसानों, स्वास्थ्य क्षेत्र, शिक्षा, उद्योग और आम नागरिकों के लिए अधिक प्रभावी समाधान उपलब्ध कराने की संभावनाएं हैं।
उन्होंने एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि भारत Safe and Trusted AI Framework विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है, ताकि एआई तकनीक का विकास नवाचार के साथ-साथ सुरक्षा, विश्वास, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के सिद्धांतों पर आधारित हो।
उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति, तकनीकी प्रतिभा, विशाल डिजिटल आधार और नवाचार क्षमता उसे आने वाले समय में वैश्विक एआई इकोसिस्टम में अग्रणी भूमिका निभाने की मजबूत स्थिति प्रदान करते हैं। भारत के पास एआई को केवल तकनीक के रूप में अपनाने के बजाय इसे विकास, समावेशन और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाने का अवसर है।











