नमक, चीनी या वसा में एक भी तत्व तय सीमा से ज्यादा हुआ तो लगेगा लाल निशान

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने ‘फ़्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग’ (FoPL) को एक ही चरण में लागू करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत, ज्यादा नमक, चीनी या फैट वाले पैक्ड फ़ूड प्रोडक्ट्स पर साफ तौर पर दिखने वाले वॉर्निंग लेबल लगाए जाएंगे।

भारत सरकार ने बुधवार को पैकेज्ड फूड (डिब्बाबंद खाने) पर प्रस्तावित चेतावनी लेबल के नियमों को और कड़ा कर दिया है। खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नए फैसले के अनुसार, डिब्बाबंद खाने में नमक, चीनी या वसा में से कोई एक भी पोषक तत्व निर्धारित सीमा से अधिक होगा, तो उस पर लाल रंग का चेतावनी प्रतीक लगाना अनिवार्य होगा। यह फैसला लेने के दौरान एफएसएसएआई ने अपनी पुरानी योजना को वापस ले लिया है। इसमें चेतावनी लेबल सिर्फ तभी अनिवार्य होता है, जब दो या दो से अधिक घटक तय सीमा से अधिक होते।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने इस नियम को बहुत ढीला बताया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर सवाल उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एफएसएसएआई के दस्तावेज के अनुसार, चेतावनी लेबलों को अब अलग-अलग चरणों के बजाय एक ही चरण में लागू किया जाएगा। चेतावनी प्रतीक एक सफेद चौकोर पृष्ठभूमि के भीतर ‘छह कोनों वाले आकार’ में लाल रंग का होगा, जो अत्यधिक नमक, चीनी या वसा की मौजूदगी को दर्शाएगा।
बता दें, भारत का फूड और ड्रिंक्स बाजार दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। नेस्ले, यूनिलीवर, कोका-कोला और पेप्सीको जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनियों के साथ-साथ बड़ी भारतीय कंपनियों पर भी इन नियमों का सीधा प्रभाव पड़ेगा।

यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे के जरिए दिया गया था। कोर्ट ने फूड रेगुलेटर और सरकार से फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल लागू करने के लिए एक साफ समय-सीमा मांगी थी। प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत, जिन पैक्ड फ़ूड प्रोडक्ट्स में चिंता वाले न्यूट्रिएंट्स (पोषक तत्व) तय सीमा से ज्यादा होंगे, उनके पैक के सामने सफेद चौकोर बैकग्राउंड पर लाल रंग का हेक्सागन (छह कोनों वाली आकृति) दिखाना जरूरी होगा।

इस वॉर्निंग लेबल का मकसद ग्राहकों को खरीदारी के समय साफ और आसानी से समझ आने वाली न्यूट्रिशनल जानकारी देना है, ताकि वे खाने-पीने की चीज़ों के बारे में सही फैसला ले सकें। FSSAI ने कहा कि वह FoPL को चरणों में लागू करने के बजाय एक ही चरण में लागू करने की योजना बना रहा है। रेगुलेटर ने बताया कि वॉर्निंग का यह फ़ॉर्मेट कनाडा में अपनाए गए मॉडल जैसा ही है और इसे ऐसे न्यूट्रिएंट्स को उजागर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिनके ज़्यादा सेवन से सेहत को जोखिम हो सकता है।

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