
भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए श्रावण का महीना सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। आज श्रावण का दूसरा सोमवार है। इस खास अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। इस बार खास ये भी है कि 6 साल बाद सावन के दूसरे सोमवार पर श्रावण सोमवार और सोम प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बना है। इसके साथ ही, कल यानी 11 अगस्त को श्रावण की मुख्य शिवरात्रि भी मनाई जाएगी। ऐसे में सोमवार और शिवरात्रि का यह दुर्लभ संयोग शिव भक्तों के लिए विशेष फलदायी सिद्ध होने वाला है।
श्रावण के सोमवार पर केवल जल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग चीजों से भगवान शिव का अभिषेक करने का विशेष महत्व बताया गया है। गंगाजल को बेहद पवित्र माना जाता है। श्रावण सोमवार पर शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे मन की शुद्धि होती है और नकारात्मकता दूर करने में मदद मिलती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार दूध से अभिषेक करने से सुख-शांति और समृद्धि की कामना पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है। शिवलिंग पर दही अर्पित करने से जीवन में स्थिरता और सुख की प्राप्ति होती है। दही अर्पित करने के बाद शिवलिंग को साफ जल से स्नान जरूर कराना चाहिए। शिवलिंग पर शहद चढ़ाने से जीवन में मधुरता और सकारात्मकता आने की कामना की जाती है। शिवलिंग पर गन्ने का रस भी अर्पित किया जाता है। इसे सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति से जोड़कर देखा जाता है। बेलपत्र भगवान शिव को बेहद प्रिय है। बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि पत्ते साफ और साबुत हों। धार्मिक मान्यता के अनुसार तीन पत्तियों वाले बेलपत्र को विशेष शुभ माना जाता है।
सावन सोमवार पर जलाभिषेक के बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और शमी के पत्ते अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। विष की गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं और भक्तों ने उनका जल से अभिषेक किया। तभी से सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है।












