वर्ल्ड बायोफ्यूल डे : 10 अगस्त, बायोफ्यूल उत्पादन में अमेरिका नंबर एक और ब्राजील दूसरे नंबर पर

महंगा तेल और बढ़ता प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौतियां बन चुके हैं। साथ ही दुनिया के अस्थिरता के माहौल में सप्लाई चेन बाधित होने से दुनिया को पेट्रोल डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे समय में बायोफ्यूल एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आया है। बायोफ्यूल पौधों, अनाज, गन्ने, मक्का, वनस्पति तेल, जैविक कचरे और पशु अवशेषों से बनाया जाता है।

दुनिया के कुल बायोफ्यूल उत्पादन में अमेरिका नंबर एक है। वहीं, गन्ने से एथनॉल बनाने और उसे रोजमर्रा की परिवहन व्यवस्था का सफल हिस्सा बनाने में ब्राजील को दुनिया का सबसे प्रभावशाली मॉडल माना जाता है। इंडोनेशिया, चीन भी इस मामले में आगे आए हैं। भारत भी ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से इस ओर कदम बढ़ा चुका है।

अमेरिका में बायोफ्यूल उत्पादन का सबसे बड़ा आधार मक्का है। मक्का से एथनॉल तैयार किया जाता है। यह एथनॉल पेट्रोल में मिलाया जाता है. इससे पेट्रोल की खपत कम होती है। अमेरिका में एथनॉल के साथ बायोडीजल और रिन्यूएबल डीजल का भी उत्पादन होता है। ब्राजील कुल उत्पादन में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है। ब्राजील ने 1970 के दशक में तेल संकट के दौरान एथेनॉल को गंभीरता से अपनाना शुरू किया था। तब से देश ने गन्ने से बनने वाले ईंधन को अपनी परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बना लिया। ब्राजील में बड़ी संख्या में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन चलते हैं। ये वाहन पेट्रोल, एथनॉल या दोनों के मिश्रण से चलते हैं।

बायोफ्यूल उत्पादन में इंडोनेशिया तीसरे स्थान पर है। इंडोनेशिया की ताकत पाम ऑयल से बनने वाला बायोडीजल है। देश में डीजल में बायोडीजल मिलाने की नीति लागू है। इसे बी-35 नीति के नाम से जाना जाता है। इसका मतलब है कि डीजल में 35 प्रतिशत तक बायोडीजल शामिल किया जा सकता है।

चीन इस सूची में चौथे स्थान पर है। चीन एथनॉल, बायोडीजल और कचरे से बनने वाले जैव ईंधन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। चीन कृषि और शहरी जैविक कचरे के बेहतर इस्तेमाल पर भी काम कर रहा है। चीन एथनॉल, बायोडीजल और कचरे से बनने वाले जैव ईंधन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।

भारत दुनिया के टॉप पांच बायोफ्यूल उत्पादक देशों में शामिल है। भारत पेट्रोल में एथनॉल मिलाकर पेट्रोलियम आयात घटाने की दिशा में काम कर रहा है। एथनॉल के लिए गन्ने के अलावा मक्का, टूटे चावल और अन्य अनुमत कृषि स्रोतों का इस्तेमाल किया जा रहा है। एथनॉल उत्पादन के लिए फसलों की मांग बढ़ने से कृषि क्षेत्र को नया बाजार मिल सकता है। इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल से बायोडीजल बनाने की संभावना भी बढ़ रही है। कृषि अवशेषों, गोबर और जैविक कचरे से बायोगैस तथा कंप्रेस्ड बायोगैस भी तैयार की जा सकती है। इससे पराली जलाने जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिल सकती है। आने वाले समय में बायोफ्यूल का ध्यान केवल गन्ने और मक्का तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि कचरा, पराली, लकड़ी के अवशेष, शैवाल, नगरों का जैविक कचरा और इस्तेमाल किया गया खाद्य तेल महत्वपूर्ण स्रोत बन सकते हैं।

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