
– राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत दिल में छेद होने पर हुआ मुफ्त उपचार
– जन्म से 18 साल तक के बच्चों को 47 प्रकार की बीमारियों का मुफ्त उपचार कराने का है प्रावधान
– आरबीएसके के तहत दो वर्षो में 228 मासूमों को मिली नई जिंदगी
आगरा,
विकास खण्ड अछनेरा के ग्राम साधन निवासी गजेंद्र पाल सिंह के घर 24 नवम्बर 2024 को पुत्री लविश्का का जन्म हुआ। जन्म के कुछ समय बाद परिवार को पता चला कि लविश्का के दिल में छेद है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण बच्ची का उपचार संभव नहीं हो पा रहा था। परिवार को बीमारी की गंभीरता और सरकारी उपचार सुविधाओं की जानकारी भी नहीं थी। ऐसे में परिवार के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) वरदान साबित हुआ। क्षेत्रीय आशा कार्यकर्ता और नजदीकी की स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से परिवार को आरबीएसके के बारे में जानकारी प्राप्त हुई।
विकास खण्ड अछनेरा की आरबीएसके की टीम बी की डॉ. लता मिश्रा, डॉ. दीप्ति बरूण, संतोष कुमार (ऑप्टोमेट्रिस्ट) एवं अनीता कौशिक (एएनएम) द्वारा बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण किया। टीम द्वारा बच्चे के परिजनों को सरकार द्वारा चलाये जा रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी गयी। इससे परिवार के लोगों में बच्ची के उपचार हेतु आशा की किरण जगी। जिसके पश्चात जनपद स्तर से डीईआईसी मैनेजर रमाकान्त शर्मा के सहयोग से बच्चे को जवाहरलाल नेहरू मेडीकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग में संदर्भित किया गया। जहाँ बच्ची समस्त आवश्यक जाँचें निःशुल्क कराई गईं। दिनांक 30 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बच्ची की सफलतापूर्वक निःशुल्क सर्जरी की गई। उपचार का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया गया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को कोई वित्तीय बोझ नहीं उठाना पड़ा।
बच्ची के गजेंद्र पाल सिंह और परिजनों ने आरबीएसके टीम एवं स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर पहचान और निःशुल्क उपचार से उनकी बेटी लविश्का को नया जीवन मिला है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बच्चों में जन्मजात रोगों की समय पर पहचान कर निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे न केवल बच्चों का जीवन बचाया जा रहा है बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी एक उम्मीद मिल रही है।
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भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत चलाई जा रही योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों में स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआती पहचान और उनका मुफ्त इलाज करना है। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से बच्चों में 4 श्रेणियों (जन्मजात दोष, कमियां, बीमारियां और शारीरिक विकास में देरी व विकलांगता) के तहत आने वाली 47 स्वास्थ्य स्थितियों/बीमारियों की जांच करता है। आरबीएसके के तहत संपूर्ण उपचार व दवाइयों का खर्च सरकार द्वारा उठाया जाता है।
– डॉ. अरुण श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लॉक स्तर पर समर्पित आरबीएसके की टीमें (जिसमें आयुष डॉक्टर, एएनएम और फार्मासिस्ट होते हैं) समय-समय पर स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों का दौरा करती हैं। यहां पर बच्चों की स्क्रीनिंग करके कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले रोगों से पीड़ित बच्चों का उपचार करने के लिए संदर्भन किया जाता है।
– डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम नोडल अधिकारी
जनपद आगरा में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जन्मजात व गंभीर रोगों से जूझ रहे वर्ष 2025-26 में 152 बच्चों और 2026-27 में अभी तक 76 बच्चों को उपचार मिल चुका है।







