मौलाना उस्मानी व् उसके संगठन की गहन जाँच होगी

पुलिस ने रिमांड के लिए दिल्ली के एक मौलवी को कोर्ट में पेश किया है
धर्म विरोधी टिप्पणियों को सबक सिखाने के लिए लोगों को उकसाने के लिए पूरे भारत में सभा आयोजित करने का मौलाना का उकसाना

अहमदाबाद जिले के धंधुका में किशन भरवाड़ नाम के युवक की हत्या में शामिल दिल्ली के मौलाना कामरगनी उस्मानी और गुजरात के अजीम बशीरभाई समन को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

आरोपियों को एक विशेष अदालत में पेश किया गया और पुलिस ने इस आधार पर रिमांड पर लिया कि मौलाना उस्मानी और उनका संगठन पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी से संबद्ध थे और धर्म के मुद्दे पर भारत के विभिन्न हिस्सों में लोगों को फिर से उकसा रहे थे। अदालत ने 14 दिन की रिमांड मंजूर की है।

विशेष लोक अभियोजक जे.सी. पटेल ने आरोप लगाया कि मौलाना कामरगनी उस्मानी उर्फ ​​उस्मानमिया हबीबुद्दीन उस्मानी ने तहरीक-ए-फ्रोग नाम से एक संगठन चलाया था। जांच में सामने आया है कि मौलाना और उसका संगठन कराची में दावत-ए-इस्लामी संगठन से जुड़ा था। वह भारत के विभिन्न शहरों और क्षेत्रों की यात्रा करता था और लोगों को भड़काने के लिए धार्मिक उपदेश देता था।

वह लोगों को मॉब लिंचिंग और धर्म विरोधी टिप्पणी करने वालों को सबक सिखाने के लिए उकसा रहा था। उन्हें भड़काऊ टिप्पणी करने के लिए त्रिपुरा राज्य में बुक किया गया था और उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें जमानत दे दी गई थी।

यह जानने के लिए बैंक स्टेटमेंट की जांच करना जरूरी है कि क्या उसके संगठन को भारत और विदेशों से फंडिंग मिली है। यह पता लगाना भी जरूरी है कि गुजरात में हुई विभिन्न बैठकों में कौन शामिल हुआ।

इसके अलावा एक अन्य आरोपी अजीम बशीरभाई समा के खिलाफ राजकोट में कई अन्य मामले भी दर्ज हैं।इस अपराध में प्रयुक्त पिस्टल और कारतूस अजीम लाकर मौलाना अयूब को दे दिए गए थे। राजकोट में अज़ी के खिलाफ हत्या, हमला, शस्त्र अधिनियम और निषेध अधिनियम के तहत दस से बारह अपराध दर्ज किए गए हैं।

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