भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति होते हुए वैश्विक हथियार आपूर्तिकर्ता भी बनकर उभरा है। आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच चल रहे तनाव में भारतीय हथियारों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। हालांकि भारत युद्ध का पक्षधर नहीं है, लेकिन रक्षा उद्योग के इस नए युग में उसकी भागीदारी अब वैश्विक भू-राजनीति को प्रभावित कर रही है।
यदि आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच पूर्ण युद्ध छिड़ता है, तो यह केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान, तुर्की, इज़राइल, रूस और संभवतः पश्चिमी देश इस संघर्ष में अपने हितों की रक्षा के लिए कदम उठा सकते हैं। ऐसे में भारत द्वारा भेजे गए हथियार इस युद्ध में निर्णायक साबित हो सकते हैं चाहे वह सीमा की सुरक्षा हो या जवाबी हमले की क्षमता।
कई ऐसे महत्वपूर्ण हथियार हैं जो भारत ने आर्मेनिया अजरबेजान को बेचे हैं। इनमें आकाश एयर डिफेंस सिस्टम आर्मेनिया भारत से 720 मिलियन डॉलर में खरीद चुका है, जो दुश्मन के लड़ाकू विमानों और ड्रोन को रोकने की क्षमता रखती है। पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम जो युद्ध के मैदान में निर्णायक मारक क्षमता प्रदान करने वाला है। यह स्वदेशी रॉकेट सिस्टम अब अर्मेनियाई सेना के बेड़े में शामिल है।
एंटी-ड्रोन सिस्टम और गोला-बारूद आधुनिक युद्ध के इस निर्णायक पहलू पर भी भारत ने आर्मेनिया को उच्च तकनीक से लैस किया है। होवित्जर तोपें और एंटी-टैंक रॉकेट पहाड़ी और कठिन इलाकों में अजरबैजान के बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ अर्मेनिया को बढ़त दिलाने के लिए अति







