कश्मीरी गेट व्यापार समिति के तत्वाधान में मशहूर शायर कलीम नूरी फिरोजाबादी के सम्मान में एक साहित्यिक मुशायरा

फिरोजाबाद,

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल से सम्बध्द कश्मीरी गेट व्यापार समिति के तत्वाधान में मशहूर शायर कलीम नूरी फिरोजाबादी के सम्मान में एक साहित्यिक मुशायरा का आयोजन 13-जून 2026 रात 9 बजे वरीशा फोटो स्टूडियो कश्मीरी गेट फिरोजाबाद पर किया गया। मुशायरा की शमा रोशन व्यापार समिति कश्मीरी गेट के अध्यक्ष मंजर नवाब ने की और अध्यक्षता व्यापार समिति के मुन्ने खां साहब ने की। मुख्य अतिथि मशहूर उस्ताद ज़ीरो बांदवी साहब और पिंटू साहब थे।
एक शाम कलीम नूरी के नाम आयोजित इस मुशायरा में कलीम नूरी फिरोजाबादी का मुशायरा अध्यक्ष ने पगड़ी बांधकर और अतिथियों ने फूल-मालाऐं पहना सम्मान किया। मुशायरा का सफल संचालन मंजर नवाब ने किया।
मुशायरे का आरम्भ शायर अख्तर दहलवी की नाते पाक से हुआ, उन्होंने नबी की शान में नाते पाक यूं पेश की:–
” खुदा गवाह है कुरआने पाक में अख़्तर
मेरे नबी का बड़ा एहतराम आया है”
नाते नबी के बाद बहारिया दौर का आगाज़ करते हुए अख्तर दहलवी का यह शेर बहुत पसंद किया गया…
” सर आंखों पे तेरी क़सम ले लिया है
ख़ुशी जान कर तेरा ग़म ले लिया है”
अमजद रज़ा के ये शेर खूब पसंद किये गये…
रखी जब उन के आगे बात दिल की
समझ में आ गयी औका़त दिल की।
श्रोताओं ने उनका यह शेर खूब पसंद किया
ग़ुलामी की पड़ी है तुम को आदत
तुम्हारे बस की सरदारी नहीं है।
मशहूर शायर कलीम नूरी फ़ीरोज़ाबादी ने श्रोताओं की फरमाइश पर कई ग़ज़लें और गीत पढ़ें। उनका ये कलाम ख़ूब पसंद किया गया।
” मेरी क़िस्मत में तेरी दीद नहीं लिक्खी है
रोज़े लिक्खे हैं मगर ईद नहीं लिखी है”
उनका यह कलाम खूब पसंद किया गया…
रुक सकें कैसे अब मेरे नाले
जिस्म क्या रूह पर भी हैं छाले
जिस को समझा था दिल का टुकड़ा मैं
दिल के टुकड़े उसी ने कर डाले
मन्ज़र नवाब की शायरी ने श्रोताओं को खूब हंसाया उन्होंने पढ़ा
” बड़ा ख़राब है मौसम बुरा ज़माना है
किसी तरह से मुझे अपना सर बचाना है
मैं अपनी बीवी से डरता हूं इसलिए मंज़र
कि उसके बाप का जूतों का कारखाना है” बज़्म-ए-फ़रोग़-ए-अदब के अध्यक्ष असलम अदीब
ने अपनी शायरी से यूं पैग़ाम दिया।
” मिला है क्या तुम्हें अब तक बताओ
चमन में पेड़ नफ़रत के लगा कर
मिटाओ नफ़रतौं के ये अंधेरे
मुहब्बत के दिये हर सू जला कर”
हाजी ऐज़ाज सिद्दीकी ने अपना कलाम यूं पेश किया…
” ज़रूरत जब भी पड़ती है ख़ुदा से मांग लेता हूं
मुझे ग़ैरौं के आगे हाथ फैलाना नहीं आता”
दुनियां भर में मशहूर हास्य व्यंग के बाकमाल शायर उस्ताद ज़ीरो बांदवी साहब के कलाम ने श्रोताओं को हंसी के ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। उनके ये अशआर खूब पसंद किए गये।
” सूरत से तो भोले थे वो किरदार से कोरे
दुल्हन नहीं समधन पे भी डाले गए डोरे
होने लगा बारात का डंडों से स्वागत
दूल्हा भी छिछोरा था बाराती भी छिछोरे ”
अन्य शायरौ के कलाम को भी श्रोताओं ने खूब पसंद किया।
मुशायरा देर रात तक चला श्रोता शायरों के काव्य पाठ से गदगद होते रहे।अंत में मुशायरे के अध्यक्ष मुन्ने खां साहब ने व्यापार समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
और कामयाब मुशायरे के लिये कन्वीनर मंज़र नवाब को मुबारकबाद दी।
मंज़र नवाब साहब ने सभी शायरों और
श्रोताओं का शुक्रिया अदा किया।मुशायरे में मुख्य रूप से व्यापार समिति कश्मीरी गेट के असलम खान ,डा०अनीस, शाहिद,रिजवान,अफ्फान, मुदस्सिर, पिंटू भाई, मोहम्मद शाहिद,अलफैज़, फुरकान, शफीक, शहजाद, अफसर ,संजय, राजीव,राकेश,रवि प्रकाश आदि का सराहनीय सहयोग रहा।

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